हरियाणा में IPS अफसरों की प्रमोशन लिस्ट विवादों में घिर गई है। क्रिकेटर से DSP बने जोगिंदर शर्मा ने प्रमोशन लिस्ट को लेकर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। जोगिंदर शर्मा ने IPS अफसर प्रमोट किए जाने वाले 12 अफसरों में अपना नाम शामिल न होने पर आपत्ति जताई है।
DSP जोगिंदर शर्मा ने कहा- ”सरकार 2021 की सिलेक्शन लिस्ट के लिए IPS पद पर प्रमोशन के लिए स्टेट पुलिस सर्विस के 12 अधिकारियों के नामों पर विचार कर रही है। लिस्ट में शामिल अधिकांश DSP 2009 में राज्य पुलिस में शामिल हुए थे।
इसके बावजूद उन्हें लिस्ट में शामिल नहीं किया गया जबकि वह 5 अक्टूबर 2007 को सेवा में शामिल हुए थे। नियमों के अनुसार सभी 11 DSP से पहले उन्होंने प्रोबेशन पूरी की थी। उनके साथ प्रमोशन को लेकर भेदभाव किया जा रहा है।” जोगिंदर शर्मा 2007 में तत्कालीन भूपेंद्र सिंह हुड्डा की कांग्रेस सरकार में DSP बनाए गए थे।
हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में DSP जोगिंदर सरकार ने तर्क दिया है कि राज्य अथॉरिटी ने लिस्ट में अवैध रूप से उल्लेख किया है कि ट्रेनिंग पूरा होने पर याची की सेवा कन्फर्म की जाती है। यह शर्त नियुक्ति पत्र एवं नियमों के विरुद्ध होने के साथ पूरी तरह से अवैध है। नियुक्ति पत्र या प्रासंगिक नियमों में ऐसा कोई भी उल्लेख नहीं है कि प्रोबेशन कन्फर्म के लिए ट्रेनिंग पूरी करना आवश्यक है।
याचिका के अनुसार, नियम 10 को पढ़ने से यह स्पष्ट हो जाता है कि सेवा में प्रवेश करने वाला कोई ट्रेनी नहीं है और उसे एक पूर्ण कर्मचारी के रूप में सेवा में शामिल किया गया है। प्रशिक्षण पूरा होने से पहले की याचिकाकर्ता की सेवा अवधि को सेवा से बाहर नहीं किया जा सकता है।
हाईकोर्ट से DSP ने ये मांग रखी DSP जोगिंदर शर्मा ने 23 और 29 नवंबर के ऑर्डर को संशोधित करने और 5 अक्टूबर 2009 से DSP के रूप में उनकी सेवा कन्फर्म करने और उन्हें वरिष्ठता और पदोन्नति आदि सहित सभी परिणामी लाभ प्रदान करने के निर्देश देने की मांग की है। अब चूंकि मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया है, इस कारण से सरकार भी कुछ भी कहने से बच रही है।
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