चंडीगढ़।
हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जननायक जनता पार्टी (JJP) का साढ़े 4 साल चला गठबंधन टूट गया है। अब जजपा को भी टूट का खतरा सताने लगा है। जजपा के 5 विधायक अंदरखाते भाजपा के साथ हैं। दिल्ली में विधायक जजपा की विधायक दल की मीटिंग से रामकुमार गौतम, देवेंद्र बबली, रामनिवास सुरजाखेड़ा, ईश्वर सिंह, जोगीराम सिहाग ने किनारा कर लिया है।
मंगलवार सुबह जजपा विधायक रामकुमार गौतम ने कहा कि दुष्यंत का इलाज कर दो, मुझे कोई मंत्री पद नहीं चाहिए। उधर, गठबंधन टूटने के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नायब सैनी को विधायक दल का नेता चुना गया है। अब 6 महीने के लिए वह प्रदेश के नए मुख्यमंत्री होंगे।
इस बार भाजपा निर्दलीय विधायकों के दम पर सरकार बनाने जा रही है। भाजपा के पास 41 विधायक हैं। बहुमत के आंकड़े 46 तक पहुंचने के लिए उन्हें 5 और विधायकों की जरूरत है। हालांकि, 6 निर्दलीय और एक हलोपा विधायक भाजपा के साथ हैं। ऐसे में भाजपा के पास कुल 48 विधायक हैं। नवंबर 2024 में विधानसभा चुनाव होने हैं। BJP इतने निर्दलीय विधायकों के सहारे सरकार चला सकती है। पात्री सूत्रों के अनुसार, कुछ निर्दलीय विधायक और हलोपा विधायक गोपाल कांडा को मंत्री बनाया जा सकता है।
2019 में हुए विधानसभा चुनाव में जजपा को 10 सीट मिली थी। दुष्यंत चौटाला को डिप्टी सीएम बनाया गया था। इसके अलावा अनूप धानक को श्रम एंव रोजगार राज्य मंत्री और देवेंद्र बबली को पंचायत मंत्री बनाया गया।
गठबंधन के बाद से ही नारनौंद से जजपा विधायक रामकुमार गौतम ने मंत्री या पद न देने पर दुष्यंत चौटाला को घेरना शुरू कर दिया था। वह लगातार दुष्यंत चौटाला के खिलाफ बयानबाजी कर रहे थे। नरवाना से विधायक रामनिवास सुरजाखेड़ा भी पिछले दिनों जजपा से नाराज चल रहे हैं। सुरजाखेड़ा कह चुके हैं कि डिप्टी सीएम ने नरवाना के विकास के साथ भेदभाव किया है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, रामकुमार गौतम, रामनिवास सुरजाखेड़ा, जोगी राम सिहाग, ईश्वर सिंह और देवेंद्र बबली जजपा से अलग होकर भाजपा को समर्थन दे सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो प्रदेश में जजपा टूट जाएगी।
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