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इन मरीजों के लिए हरियाणा सरकार ने उठाया अहम कदम, इलाज के लिए आय प्रमाण पत्र की बाध्यता खत्म

मस्क्युलर डिस्ट्रोफी से जूझ रहे मरीजों के लिए हरियाणा सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। अब प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में इस बीमारी के इलाज के लिए किसी प्रकार का आय प्रमाण पत्र (इनकम सर्टिफिकेट) जरूरी नहीं होगा। यह फैसला ऐसे मरीजों और उनके परिजनों को बड़ी राहत देगा, जिनके लिए पहले से ही इस बीमारी का महंगा इलाज आर्थिक बोझ बन रहा था।

विधानसभा के मानसून सत्र में मुलाना की विधायक पूजा ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मस्क्युलर डिस्ट्रोफी बेहद गंभीर और लाइलाज बीमारी है, जिसकी संख्या प्रदेश में लगातार बढ़ रही है। इस पर स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने जानकारी दी कि फिलहाल हरियाणा में इस बीमारी से 116 मरीज पीड़ित हैं।

स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने स्वीकार किया कि मस्क्युलर डिस्ट्रोफी का मुख्य इलाज केवल भारत सरकार द्वारा निर्धारित उत्कृष्टता केंद्रों (सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस) में ही उपलब्ध है, जबकि हरियाणा के सभी सरकारी अस्पतालों में मरीजों को सहायक उपचार दिया जा रहा है। सरकार के इस फैसले से अब आर्थिक रूप से कमजोर मरीज भी बिना किसी अतिरिक्त दस्तावेजी झंझट के इलाज पा सकेंगे।