बिहार में नवनिर्वाचित विधायकों में से लगभग 12 प्रतिशत महिलाएं हैं और पिछले चुनावों की तुलना में इसमें मामूली वृद्धि हुई है. नयी विधानसभा में लगभग 40 प्रतिशत सदस्यों के पास कॉलेज की डिग्री नहीं है. यह जानकारी विचारक संस्था ‘पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च’ की एक रिपोर्ट के अनुसार है.
85 प्रतिशत की स्ट्राइक रेट से जीत
एनडीए की प्रचंड जीत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसके दो प्रमुख घटक दलों (बीजेपी और जेडीयू) ने लगभग 85 प्रतिशत की स्ट्राइक रेट से जीत हासिल की. बीजेपी और जेडीयू दोनों ने 101-101 सीट पर चुनाव लड़ा था. ‘पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च’ द्वारा परिणामों के विश्लेषण से पता चला है कि 243 सदस्यीय विधानसभा में अब 29 महिला विधायक होंगी, जो सदन की कुल संख्या का लगभग 12 प्रतिशत है. पिछली विधानसभा में 26 महिला सदस्य थीं.
15 विधायकों के पास कॉलेज की डिग्री नहीं
विधानसभा के लिए चुनी गईं 29 महिलाओं में से 13 की उम्र 25 से 39 साल के बीच है और नौ की उम्र 40 से 54 साल के बीच है. इनमें से लगभग आधी यानी 15 विधायकों के पास कॉलेज की डिग्री नहीं है. कुल मिलाकर विधानसभा में 55 वर्ष या उससे अधिक आयु के विधायकों का प्रतिशत 2015 में 34 प्रतिशत से बढ़कर 2020 में 40 प्रतिशत और 2025 में 46 प्रतिशत हो गया.
32 प्रतिशत नवनिर्वाचित विधायक स्नातक
नयी विधानसभा में स्नातकोत्तर डिग्री वाले विधायकों की संख्या 2020 में 23 प्रतिशत की तुलना में बढ़कर 28 प्रतिशत हो गई. उच्चतर माध्यमिक स्तर तक की योग्यता रखने वालों का अनुपात 2020 में 38 प्रतिशत से बढ़कर 40 प्रतिशत हो गया. नवनिर्वाचित विधायकों में से लगभग 32 प्रतिशत स्नातक हैं, जबकि पिछली विधानसभा में यह संख्या 40 प्रतिशत थी.

















