20 साल से लावारिस जीवों को रोजाना भोजन दे रहे सुरेंद्र सोनी

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भिवानी। शहर की गलियों में जैसे ही लाउडस्पीकर से ‘तो-तो’ की आवाज गूंजती है वैसे ही लावारिस कुत्ते उस दिशा में दौड़ पड़ते हैं। यह नजारा रोज देखने को मिलता है। यह आवाज है सेवा नगर कॉलोनी निवासी 58 वर्षीय सुरेंद्र सोनी की जो पिछले करीब 20 वर्षों से लावारिस कुत्तों और बेजुबान जीवों की सेवा में जुटे हुए हैं।

सुरेंद्र सोनी अपनी इलेक्ट्रॉनिक स्कूटी पर 30 लीटर दूध का ड्रम, करीब 10 किलो आटे से बनी रोटी और हलवा साथ ही पांच किलो गुड़ लेकर रोजाना शहर में निकलते हैं। वे दिनभर में करीब 24 किलोमीटर के दायरे में घूमकर लावारिस कुत्तों और बंदरों को निशुल्क भोजन कराते हैं। सर्दी के मौसम में भी बेजुबानों को जीवन की खुराक लगातार मिल रही है।

सेवा नगर निवासी सुरेंद्र सोनी ने बताया कि उनकी बेड बनाने की फैक्टरी है। पहले वे खुद काम संभालते थे अब उनके बच्चे काम संभाल रहे हैं। सभी बच्चे शादीशुदा हैं। जीवन की जिम्मेदारियां निभाने के बाद उन्होंने खुद को आध्यात्म और जीव सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने बताया कि उनके पास एक चार्जेबल माइक है जिससे वे रोज घर से निकलते समय ‘तो-तो’ की आवाज लगाकर लावारिस कुत्तों को बुलाते हैं। उनके पास दूध और रोटी देने के लिए छोटी कटोरियां हैं। भोजन डालते ही कुत्ते उसे बड़े चाव से खाते हैं। सुरेंद्र सोनी ने कहा कि सर्दी, गर्मी, बारिश या किसी भी विपरीत परिस्थिति में वे अपनी सेवा का नियम नहीं तोड़ते।

घायल जीवों का भी करते हैं खुद प्राथमिक उपचार

सुरेंद्र सोनी ने बताया कि रास्ते में यदि उन्हें कोई घायल जीव दिखाई देता है तो वे उसका खुद प्राथमिक उपचार करते हैं। वे कुत्ते, बिल्ली के अलावा पक्षियों का भी प्राथमिक उपचार करते हैं। अब तक वे करीब 550 से अधिक बेजुबान जीवों का प्राथमिक उपचार कर चुके हैं।घर के पास बनाई है जीवों का भोजन तैयार करने के लिए रसोई

सुरेंद्र सोनी ने घर के पास ही लावारिस जीवों के लिए भोजन तैयार करने की अलग रसोई बना रखी है। सुबह उठते ही वे सबसे पहले जीवों के लिए भोजन तैयार करते हैं। इसके बाद स्कूटी लेकर शहर में निकल पड़ते हैं। रास्ते में जो भी लावारिस जीव मिलता है उसे भोजन दिए बिना आगे नहीं बढ़ते। सुरेंद्र सोनी समाजसेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। वे पशु-पक्षी एवं मानव सेवा समिति के माध्यम से जीव सेवा के साथ-साथ भागवत कथा, हवन और भंडारे भी आयोजित करते हैं। इन कार्यों में आमजन का सहयोग भी लिया जाता है। हालांकि उनका मूल उद्देश्य लावारिस जीवों को निशुल्क भोजन उपलब्ध कराना ही है।