सिरसा: समाना में 447 दिनों से जारी टावर मोर्चा अब नए चरण में प्रवेश कर रहा है. बेअदबी रोको कानून की मांग को लेकर 1 जनवरी से अमृतसर तक पैदल यात्रा शुरू होगी. इसे लेकर भारतीय किसान एकता के प्रदेश अध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख ने सिरसा में प्रेस वार्ता की. प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि, “सर्वधर्म बेअदबी रोको कानून बनवाने की मांग को लेकर पंजाब के समाना में 12 अक्टूबर 2024 से टावर मोर्चा लगातार जारी है. इस आंदोलन में भाई गुरजीत सिंह खालसा पिछले 447 दिनों से 400 फीट ऊंचे टावर पर मात्र 4×6 फीट की जगह में चढ़कर धरना दे रहे हैं, लेकिन पंजाब की भगवंत मान सरकार अब तक इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है.”
स्वास्थ्य बिगड़ने के बावजूद संघर्ष जारी: लखविंदर सिंह औलख ने आगे कहा कि, “धरने के दौरान कई बार भाई गुरजीत सिंह खालसा की तबीयत भी नाजुक हो चुकी है, इसके बावजूद वे अपने संकल्प पर डटे हुए हैं. टावर मोर्चा कमेटी ने सरकार की उदासीनता के खिलाफ आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया है, ताकि बेअदबी के मामलों पर सख्त कानून बनाया जा सके.”
1 जनवरी से अमृतसर तक पैदल यात्रा: टावर मोर्चा कमेटी ने ऐलान किया है कि 1 जनवरी 2026 से 15 जनवरी 2026 तक समाना से श्री अमृतसर साहिब तक पैदल यात्रा निकाली जाएगी. इस यात्रा का उद्देश्य सर्वधर्म बेअदबी रोको कानून की मांग को जन-जन तक पहुंचाना है.पैदल यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के लिए रात्रि पड़ाव का पूरा शेड्यूल भी जारी कर दिया गया है.
बीमा क्लेम पर सरकार की कार्रवाई: औलख ने आगे बताया कि, “भारतीय किसान एकता द्वारा 2 दिसंबर को लघु सचिवालय सिरसा में प्रदर्शन कर प्रशासन को चेतावनी दी गई थी कि यदि 15 जनवरी से पहले वर्ष 2024 का बकाया बीमा क्लेम जारी नहीं किया गया तो कृषि विभाग के बाहर पक्का मोर्चा लगाया जाएगा. इसके बाद हरियाणा कृषि विभाग और एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी की 29 दिसंबर को चंडीगढ़ में हुई बैठक में 25 गांवों के बकाया बीमा क्लेम को मंजूरी दी गई.”
धान फसल नुकसान लोकलाइज में शामिल: औलख ने बताया कि, “हरियाणा किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा की 9 सितंबर को हुई चंडीगढ़ बैठक में धान की फसल को जलभराव से हुए नुकसान को लोकलाइज में शामिल करने की मांग की गई थी. अब निर्णय लिया गया है कि खरीद 2026 में यदि किसी कारण से धान की फसल खराब होती है तो किसान लोकलाइज के तहत आवेदन कर सकेंगे.
किसानों को सतर्क रहने की सलाह: औलख ने किसानों से अपील की कि वे अपनी फसलों का पंजीकरण किसी अन्य व्यक्ति को न सौंपें और स्वयं ही सभी प्रक्रियाएं पूरी करें, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की परेशानी से बचा जा सके.

















