भिवानी। सर्दियों में शीतलहर के बीच पुराना नजला, सांस, अस्थमा, गठिया व जोड़ो के दर्द की शिकायतें मरीजों में बढ़ गई हैं। ऐसे में आयुर्वेदिक पद्धति में रसोई चिकित्सा में प्रयोग होने वाला तिल इन बीमारियों के लिए रामबाण साबित हो रहा है। जिला आयुर्वेदिक अस्पताल के ओपीडी विभाग में कार्यरत योग चिकित्सक डॉ. निशा ने बताया कि सर्दियों में शरीर दर्द और गठिया रोगी अधिक प्रभावित होते हैं। बुजुर्ग लोगों को ठंडी हवा सबसे अधिक नुकसान पहुंचाती है। ऐसे में तिल का सेवन खांसी और नजला में राहत देता है।
तिल के तेल को लौंग के साथ गर्म करके दर्द निवारक तेल तैयार किया जा सकता है। इस तेल से मसाज करने पर शरीर के दर्द में आराम मिलता है। इसके अलावा तिल के लड्डू बनाकर खाना भी सर्दियों में फायदेमंद रहता है। तिल के बीज विटामिन बी और एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर होते हैं जो रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने में मदद करते हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होने पर सामान्य सर्दी, खांसी और वायरल संक्रमण से बचाव होता है। गठिया रोगी भी तिल का उपयोग कर सकते हैं।
शरीर में खून का सर्कुलेशन करता है तिल का तेल
तिल का तेल गर्म तासीर का होता है। सर्दियों में बदन और जोड़ो के दर्द में इसकी मसाज की जा सकती है। यह तेल शरीर में गर्माहट लाता है और खून का सर्कुलेशन सुधारता है। पित्त प्रकृति वाले लोग इसका सेवन सीमित मात्रा में करें अन्यथा एसिडिटी और पेट में जलन हो सकती है।
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में आ रहे प्रतिदिन 150 मरीज
पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज के ओपीडी विभाग में खांसी और नजला के औसतन 150 मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। इसके अलावा हड्डी रोग विशेषज्ञ ओपीडी में भी बदन और जोड़ो के दर्द के मरीज आते हैं। चिकित्सक मरीजों को सर्दियों में उचित खान-पान और स्वास्थ्य सावधानियों की सलाह दे रहे हैं।

















