भिवानी: भिवानी की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने नाबालिग लड़की के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में मुख्य आरोपी मुकेश और उसके साथी करण सिंह उर्फ बिट्टू को दोषी ठहराते हुए 20-20 वर्ष के कठोर कारावास और 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. अदालत ने यह फैसला महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ अपराधों पर न्यायपालिका की सख्त नीति का प्रतीक माना है.
पीड़िता के पिता ने दर्ज कराई शिकायत: पीड़िता के पिता ने थाना बवानी खेड़ा में शिकायत दर्ज करवाई थी. शिकायत में बताया गया कि आरोपी ने उनकी नाबालिग पुत्री को स्कूल से घर लौटते समय जबरन अगवा किया और उसे एक सुनसान स्थान पर ले जाकर दुष्कर्म किया. इसके बाद आरोपी ने पीड़िता को धमकी दी कि अगर उसने घटना का खुलासा किया तो उसकी जान को खतरा होगा.
पुलिस की त्वरित कार्रवाई: शिकायत दर्ज होने के तुरंत बाद पुलिस ने आरोपीयों की खोजबीन शुरू की और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया. जांच के दौरान पुलिस ने ठोस साक्ष्य, दस्तावेज और गवाहों के बयान अदालत में प्रस्तुत किए.इन सभी ठोस प्रमाणों के आधार पर अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराया.
अदालत का फैसला: मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरुचि अटरेजा सिंह ने मुख्य आरोपी मुकेश को पोस्को अधिनियम की धारा 6 के तहत 20 वर्ष कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. इसी तरह करण सिंह उर्फ बिट्टू को भी 20 वर्ष कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने सहित अन्य संबंधित धाराओं में कठोर दंड दिया गया. जुर्माना अदा न करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.
पुलिस की सख्त चेतावनी: इस पूरे मामले में पुलिस अधीक्षक भिवानी सुमित कुमार ने कहा कि महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ अपराधों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.उन्होंने सभी थाना प्रभारियों को ऐसे मामलों में त्वरित, निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं.





















