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हरियाणा से रूठकर जा रहे विदेशी मेहमान! समय से पहले ही विदा होने लगे प्रवासी पक्षी; जानें क्या है इस संकट की वजह

झज्जर। पर्यावरण संरक्षण की वैश्विक बहसों के बीच, भिंडावास वन्यजीव अभयारण्य आज एक ऐसे गंभीर मोड़ पर खड़ा है, जहां प्रकृति और मानवीय उपेक्षा का संघर्ष स्पष्ट दिखाई देता है। हाल ही में संपन्न हुई एशियाई जलपक्षी जनगणना 2026 के आंकड़े केवल पक्षियों की गिनती नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र की ”मेडिकल रिपोर्ट” है, जिसे हम ‘वेटलैंड’ कहते हैं।

कारण, भिंडावास केवल हरियाणा का गौरव नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय महत्व की एक ”रामसर साइट” है। यदि 2026 की जनगणना हमें सचेत नहीं करती, तो वह दिन दूर नहीं जब मध्य एशिया के आसमान से आने वाले इन मेहमानों के लिए हमारे पास केवल सूखी जमीन और यादें शेष रहेंगी। यह समझना होगा कि जलीय पक्षी वेटलैंड के स्वास्थ्य के थर्मामीटर हैं, और फिलहाल भिंडावास को ”तेज बुखार” है।

संकट के तीन मुख्य आयाम

  1. जलकुंभी का ”हरा जहर”: जलकुंभी ने जलस्तर को इस कदर ढंक लिया है कि पानी में आक्सीजन कम हो गई है। गोताखोर बत्तखों के लिए लैंडिंग और भोजन की तलाश असंभव हो गई है, जिससे पक्षियों की संख्या 10,000 के मनोवैज्ञानिक आंकड़े से नीचे गिर गई है।
  2. ‘शार्ट-स्टे’ का नया ट्रेंड: ग्लोबल वार्मिंग के कारण साइबेरिया में कम ठंड पड़ने से पक्षी अब नवंबर के बजाय दिसंबर के अंत में आ रहे हैं। प्रतिकूल हालात देखते हुए वे मार्च के बजाय फरवरी में ही लौट सकते हैं।
  3. मानसून की अनिश्चितता: 2025 की बारिश से जगी उम्मीद वाष्पीकरण और खराब जल प्रबंधन के कारण फीकी पड़ गई है। पर्याप्त जल भराव के बिना वेटलैंड सहित आस-पास के क्षेत्रों का भी अस्तित्व खतरे में है।

हरियाणा राज्य जैव विविधता बोर्ड और वन्यजीव विभाग के सहयोग से टी.के. राय के नेतृत्व में हुए सर्वेक्षण के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। पारिस्थितिकीविद् और पक्षीविज्ञानी टी.के. राय के नेतृत्व में किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि भिंडावास का प्राकृतिक आवास तेजी से खराब हो रहा है।

वेटलैंड का कुछ हिस्सा सूख चुका है और जो पानी बचा है, उस पर जलकुंभी ने अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया है। जलकुंभी के इस अनियंत्रित विस्तार ने जलीय पक्षियों के लिए तैरने, भोजन ढूंढने और स्वच्छ पानी तक पहुंचने के रास्ते बंद कर दिए हैं।

आमतौर पर मार्च के अंत तक प्रवास करने वाले ये पक्षी, भोजन और पानी की कमी के चलते अब फरवरी के भीतर ही उत्तर एशिया और साइबेरिया की ओर लौटने का मन बना रहे हैं।

कुल पक्षी गणना: 9,483 (बड़ी गिरावट)

प्रजाति विविधता: 54 (27 निवासी 27 प्रवासी)

संकटग्रस्त प्रजातियां: ग्रेटर-स्पाटेड ईगल, कामन पोचार्ड और फेरुगिनस डक की उपस्थिति चिंताजनक रूप से कम रही।

संरक्षण के लिए ‘ब्लू-प्रिंट’ की दरकार

भिंडावास अंतरराष्ट्रीय महत्व की ”रामसर साइट” है। इसे बचाने के लिए बड़े पैमाने पर ड्रेजिंग कर जलकुंभी हटाना, नहरों के माध्यम से जलस्तर स्थिर करना और मानवीय हस्तक्षेप को सीमित करना अनिवार्य है। यदि हम अब भी सचेत नहीं हुए, तो भविष्य में इन विदेशी मेहमानों के लिए हमारे पास केवल सूखी जमीन और यादें शेष रहेंगी।