रोहतक: रोहतक रेलवे स्टेशन से मंगलवार दोपहर 12 बजे असम के कामाख्या के लिए उद्घाटन स्पेशल अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन रवाना हुई. इस मौके पर स्टेशन परिसर में उत्साह का माहौल देखने को मिला. यह ट्रेन लगभग 41 घंटे की लंबी यात्रा तय कर 22 जनवरी को सुबह 5 बजे कामाख्या स्टेशन पहुंचेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 जनवरी को इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर राष्ट्र को समर्पित किया था.
सुबह पहुंची, दोपहर में हुई रवाना:यह उद्घाटन स्पेशल अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन मंगलवार तड़के 3 बजकर 49 मिनट पर रोहतक रेलवे स्टेशन पहुंची थी. इसके बाद आवश्यक तैयारियों के पश्चात दोपहर 12 बजे इसे आधिकारिक रूप से रवाना किया गया.स्टेशन पर रेलवे अधिकारियों के साथ-साथ यात्रियों की भी अच्छी-खासी मौजूदगी रही.
स्टेशन अधीक्षक ने दिखाई हरी झंडी: रोहतक रेलवे स्टेशन पर स्टेशन अधीक्षक बलराम मीणा ने ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.उन्होंने कहा, “रोहतक से कामाख्या के लिए सीधी ट्रेन शुरू होना क्षेत्र के यात्रियों के लिए बड़ी सुविधा है. इससे पूर्वोत्तर राज्यों की यात्रा अब ज्यादा सहज और आरामदायक हो सकेगी.”
कई राज्यों से होकर गुजरेगी ट्रेन: यह ट्रेन हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और असम जैसे कई राज्यों से होकर गुजरेगी. अपने सफर के दौरान यह दिल्ली, गाजियाबाद, चिपियाना बुजुर्ग, गोविंदपुरी, प्रयागराज, वाराणसी, गाजीपुर सिटी, बलिया, छपरा, हाजीपुर, बछवारा, बरौनी, बेगूसराय, खगड़िया, मानसी, कटिहार, न्यू जलपाईगुड़ी, न्यू कूच बिहार और न्यू बोंगाईगांव जैसे प्रमुख स्टेशनों पर रुकेगी.
पहले दिन यात्रियों की अच्छी संख्या: उद्घाटन दिवस पर इस ट्रेन के आरक्षित डिब्बों में दो दर्जन से अधिक यात्री कामाख्या तक के सफर पर रवाना हुए, जबकि अनारक्षित डिब्बों में लगभग 80 यात्री यात्रा कर रहे हैं. यात्रियों में इस नई सुविधा को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला.
नियमित संचालन का तय शेड्यूल: सामान्य संचालन के तहत यह ट्रेन प्रत्येक शुक्रवार रात 10 बजे कामाख्या से रवाना होकर रविवार दोपहर करीब 2 बजकर 45 मिनट पर रोहतक पहुंचेगी. वहीं, वापसी में 05672 रोहतक–कामाख्या अमृत भारत एक्सप्रेस रविवार रात 10 बजकर 10 मिनट पर रोहतक से चलेगी और मंगलवार दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर कामाख्या पहुंचेगी.
धार्मिक आस्था से जुड़ा अंतिम पड़ाव: अमृत भारत एक्सप्रेस का अंतिम ठहराव असम का कामाख्या स्टेशन है, जहां मां दुर्गा को समर्पित प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर स्थित है. यह मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है और इसका उल्लेख कालिका पुराण में भी मिलता है. मान्यता है कि यहां मां सती की योनि गिरी थी, इसी कारण यहां कोई प्रतिमा नहीं है.
यात्रियों की प्रतिक्रिया: ट्रेन में सफर कर रहे यात्री बृज भूषण ने कहा, “अब हमें दिल्ली या दूसरे बड़े जंक्शन पर ट्रेन बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी.” वहीं धर्मेंद्र ने बताया, “सीधी ट्रेन मिलने से समय और परेशानी दोनों की बचत होगी.”
पेंट्री सेवा भी विशेष रूप से तैयार: इस ट्रेन की पेंट्री को भी खास तौर पर तैयार किया गया है. रसोई भंडार के इंचार्ज राजन ने कहा, “नियमित संचालन के दौरान यात्रियों को शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार का भोजन उपलब्ध कराया जाएगा.” रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह ट्रेन पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़ाव को और मजबूत करेगी.





















