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“अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं”, बयानवीर मंत्रियों को अनुशासन का पाठ पढ़ाएगा भाजपा संगठन

पंचकुला। दक्षिण हरियाणा में एक-दूसरे पर सियासी तीर चलाकर पार्टी संगठन को असहज करने वाले केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, प्रदेश के कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह और पूर्व मंत्री अभय सिंह को भाजपा अध्यक्ष बुलाकर नसीहत देंगे।

इसी तरह ब्रज क्षेत्र के दिग्गज नेता और केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, प्रदेश के खेल मंत्री गौरव गौतम, अन्य मंत्रियों और फरीदाबाद के नगर निगम के पार्षदों को भी भाजपा अध्यक्ष बुलाकर अनुशासन का पाठ बढ़ाने वाले हैं।

मंगलवार को उन्होंने मीडिया से बातचीत में यह बताते हुए कहा कि पार्टी में अनुशासनहीनता की जगह नहीं हैं। अगर किसी से मतभेद है, तो आपस में बैठकर बात करें या पार्टी के मंच पर बात की जानी चाहिए।

बता दें, दक्षिण हरियाणा की राजनीति मंत्रियों की जुबानी जंग होने से करीब पंद्रह दिन से गरमाई हुई है। कभी राव इंद्रजीत सिंह, राव नरबीर सिंह और पूर्व मंत्री अभय सिंह सार्वजनिक मंच से टिप्पणी करते हैं, तो कभी राव नरबीर और अभय सिंह जुबानी हमला करते हैं। कई जगहों पर स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह भी अपने पिता को घेरने वाले दोनों नेताओं पर कटाक्ष कर चुकी हैं।

बीजेपी नेताओं के जुबानी जंग को लेकर कांग्रेस समेत सभी विपक्षी नेता तंज कसने लगे हैं कि भाजपा में गुटबाजी है। वहीं, पार्टी के नेता भी मानते हैं कि जुबानी जंग का असर कार्यकर्ताओं पर पड़ रहा, जो ठीक नहीं है।

गुरुग्राम में मेयर का नहीं हो पा रहा चयन 

इन नेताओं की राजनीतिक जंग के चलते ही गुरुग्राम नगर निगम में डिप्टी तथा सीनियर डिप्टी मेयर का चयन नहीं हो पा रहा है। बहुमत होने के बाद भी पार्षद दो गुट में बटे हुए हैं। एक गुट के पार्षद राव इंद्रजीत को और दूसरे गुट के पार्षद राव नरबीर सिंह को अपना नेता मानते हैं। चयन नहीं होने से विकास कार्य भी प्रभावित हो रहा है।

फरीदाबाद से पलवल तक राजनीतिक संकट

यही हाल फरीदाबाद से पलवल तक में हैं। केंद्रीय मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर और तीनों मंत्रियों के बीच जुबानी जंग चल रही है। एक दूसरे पर परोक्ष रूप से टिप्पणी भी करते हैं। जुगनू और सांप की कहानी इंटरनेट पर खूब वायरल भी हुई। दो दिन पहले नगर निगम की बैठक में सीनियर और डिप्टी मेयर नहीं बनाए जाने पर कई पार्षदों ने हंगामा काटा। जबकि पार्षद भाजपा का पटका पहन चुनाव लड़े और सदन पहुंचे हैं।

मीडिया के आगे बोलते हुए एक-दूसरे पर पार्टी लाइन से हटकर टिप्पणी करने वाले केंद्रीय मंत्रियों, प्रदेश के कैबिनेट मंत्रियों, पूर्व मंत्रियों और पार्षदों को जल्द बुलाकर बात करेंगे। मतभेद हैं तो उन्हें बैठकर सुलझा लेना चाहिए, क्योंकि सभी वरिष्ठ और गरिमापूर्ण पद पर हैं। पार्टी अनुशासन को सबसे अधिक महत्व देती है, इसे मानना ही पड़ेगा।