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हरियाणा की अनाज मंडियों में खत्म होगा ‘कच्ची पर्ची’ का खेल? हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब ACS लेंगे बड़ा फैसला

चंडीगढ़। हरियाणा की अनाज मंडियों में आढ़तियों द्वारा किसानों को दी जा रही तथाकथित ‘कच्ची पर्ची’ की व्यवस्था को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

यह जनहित याचिका कृषि वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर द्वारा दायर की गई है। डॉ. लाठर ने याचिका में मांग की है कि किसानों को दी जाने वाली ‘कच्ची पर्ची’ प्रणाली पर तत्काल रोक लगाई जाए और इसके स्थान पर अनिवार्य रूप से मुद्रित बिक्री रसीद जारी की जाए।

मंगलवार को याचिका का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू ने याची को छूट दी कि वह कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को इस बाबत मांग पत्र दें व अतिरिक्त मुख्य सचिव उस पर उचित निर्णय लेंगे।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि किसानों को दी जा रही कच्ची पर्ची की समानांतर और अनौपचारिक व्यवस्था न केवल अवैध है, बल्कि इसके जरिए किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम भुगतान कर व्यापक स्तर पर आर्थिक शोषण किया जा रहा है।

याचिका में स्पष्ट किया गया है कि मुद्रित रसीद पर संबंधित दुकान का नाम और पता, क्रमांक और तारीख सहित होनी चाहिए और फसल की बिक्री के तुरंत बाद किसान को उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि लेन-देन में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

डॉ. लाठर का कहना है कि वर्तमान में कई मंडियों में आढ़ती किसानों को पहले ‘कच्ची पर्ची’ के आधार पर कम भुगतान करते हैं, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में फसल की खरीद एमएसपी पर दर्शा दी जाती है, जिससे वास्तविक भुगतान और आधिकारिक आंकड़ों के बीच बड़ा अंतर पैदा हो जाता है।

वीरेंद्र लाठर ने याचिका में यह भी उल्लेख किया है कि उन्होंने इस कथित अवैध प्रथा को लेकर राज्य सरकार को एक विस्तृत प्रतिनिधित्व सौंपा था, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

उनका आरोप है कि ‘कच्ची पर्ची’ की यह व्यवस्था कृषि मंडी विनियमन कानूनों की मूल भावना को ही निष्फल कर देती है और कृषि उपज की बिक्री में पारदर्शिता तथा जवाबदेही को गंभीर रूप से कमजोर करती है।