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अंबाला के श्मशान घाट में भरा 2-2 फीट पानी, गंदे नाले के बीच से शव ले जाने को मजबूर हुए लोग

अंबाला। जिस शहर से देश की आजादी के लिए बगावत की पहली चिंगारी फूटी थी पर दुर्भाग्यवश उसी शहर में 77 साल बाद भी शमशान घाट तक शवों को ले जानी वाली मुख्य सड़क पर पानी निकासी की व्यवस्था नहीं हो पाई। ऐतिहासिक नगरी के नाम से पहचान रखने वाले अंबाला शहर के लोगों के इस दर्द को कोई सुनने वाला नहीं है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासन समिति के सदस्य सचिव एडवोकेट रोहित जैन ने इस अव्यवस्था पर चिंता जताते हुए सीधे तौर पर राज्य सरकार व नगर निगम के अफसरों को जिम्मेदार ठहराया है। जैन ने कहा कि हल्की सी बरसात में ही रामबाग शमशानघाट की मुख्य सड़क नदी में तब्दील हो जाती है। ऐसे में अगर किसी के परिवार में कोई मृत्यु हो जाए तो उनके लिए शव का अंतिम संस्कार करना ही चुनौती बन जाती है।

ऐसे में लोगों को 2-2 फुट पानी से होकर शव को शमशान घाट तक ले जाना पड़ता है। कई बार तो लोगों को पानी की वजह से अंतिम संस्कार तक स्थगित करना पड़ता है। जैन ने कहा कि एक तरफ तो 77वें गणतंत्र दिवस की खुशियां मना रहा है। तिरंगे के सम्मान और संविधान की गरिमा की बातें की जा रही हैं। पर दूसरी तरफ अंबाला शहर के रामबाग श्मशान घाट की बदहाल स्थिति सरकारी दावों पर आंसू बहाती दिख रही है।

अंतिम संस्कार के लिए गंदगी, जलभराव और दुर्गंध के बीच लोगों को अपमानजनक हालात का सामना करना पड़ रहा है। निकासी न होने की वजह से अब यह पानी सड़ने लगा है। इसकी दुर्गंध से हर कोई परेशान है। उन्होंने कहा कि हाल ही में सहयोगी वकील के दाह संस्कार के लिए परिजन, रिश्तेदार और गणमान्य नागरिक श्मशान घाट पहुंचे थे लेकिन श्मशान घाट के चारों ओर जमा गंदे पानी, कीचड़ की वजह से स्थिति बेहद भयावह हो गई।

मजबूरी में अंतिम संस्कार के लिए दूसरी जगह जाना पड़ा। शहर के नागरिकों ने मांग की है कि श्मशान घाट में तत्काल जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। मौके पर ज्ञान सिंह संधु, पूर्व प्रधान एडवोकेट इकबाल सिंह, कृष्ण लाल आदि ने दुख जताया।