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अंबाला शहीद स्मारक में जायके का तड़का! बनेंगे 8 फूड कोर्ट, 7 को लीज पर देने के लिए टेंडर जारी

पंचकूला: हरियाणा के पर्यटन स्थलों में जल्द ही लोग अंबाला कैंट में (अंबाला कैंट-दिल्ली) एनएच 44 पर एशिया के सबसे बड़े, आजादी की पहली लड़ाई के “शहीद स्मारक” का देख सकेंगे. 1857 की क्रान्ति की याद में वीर जवानों की बहादुरी व शहादत को नमन करने के लिए इस शहीद स्मारक का निर्माण तेजी से जारी है. राज्य सरकार को बड़ी उम्मीद है कि इसके तैयार होने पर यहां रोजाना हजारों पर्यटकों का आवागमन होगा.

आठ फूड कोर्ट सहित अन्य सुविधाओं से लैस होगा स्मारक: हरियाणा सरकार इस शहीद स्मारक को सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस कर रही है. गौर करने वाली बात है कि स्मारक की पहली मंजिल पर आठ फूड कोर्ट बनाए गए हैं. इनमें एक फूड कोर्ट का कार्पेट क्षेत्र 204.87 वर्ग फुट है और प्रत्येक फूड कोर्ट के सामने आठ वर्ग फुट का ओपन एरिया भी उपलब्ध होगा. स्पष्ट है कि कार्पेट क्षेत्र का दायरा खुले क्षेत्र के साथ पर्यटकों को सहज करेगा.

सात फूड कोर्ट के लिए टेंडर मांगे: संबंधित विभाग द्वारा शहीद स्मारक के सात फूड कोर्ट लीज पर देने के लिए टेंडर आमंत्रित किए गये हैं. यह टेंडर बोलियां लगाकर https://etenders.hry.nic.in पर आमंत्रित किए गई हैं. टेंडर की अंतिम तिथि 5 मार्च, 2026 की शाम 4 बजे तक है. इस टैण्डर की ID-2026_HRY_499803_1 है और इसके दस्तावेज और अन्य शर्तें उक्त वेबसाइट से डाउनलोड की जा सकती हैं. इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई बोलीदाता फूड कोर्ट देखना चाहता है तो वह किसी भी दिन शाम 5 बजे से पहले देख सकता है.

सांस्कृतिक दिवस मनाने का अवसर: बीते समय उच्च स्तरीय बैठक में फैसला लिया गया है कि भारत के सभी राज्य अपने-अपने राज्य के विशेष दिवस, सांस्कृतिक दिवस या स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी ऐतिहासिक तिथियों पर अपने कार्यक्रम इस शहीद स्मारक परिसर में आयोजित कर सकेंगे. हरियाणा के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में इस प्रस्ताव पर सहमति बनने के बाद सभी राज्यों को औपचारिक पत्र जारी किया गया. राज्यों से अपने सांस्कृतिक दल, कलाकार, पारंपरिक प्रस्तुतियां और व्यंजनों को इस आयोजन का हिस्सा बनाने को कहा गया है, ताकि यह स्थान एक जीवंत सांस्कृतिक उत्सव स्थल बने.

200 एकड़ में बन रहा शहीद स्मारक: अंबाला छावनी में निर्माणाधीन इस स्मारक को लगभग 200 एकड़ में बनाया जा रहा है, जो 1857 की क्रांति को समर्पित है. इतिहासकारों के अनुसार विद्रोह की शुरूआत अंबाला में मेरठ से कुछ घंटे पहले भड़क उठी थी. नतीजतन यह स्थान स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में विशेष महत्व रखता है. स्मारक का मुख्य आकर्षण 63 मीटर ऊंचा मेमोरियल टावर भी होगा, जो कमल के फूल के आकार के डिजाइन में तैयार है.

डिजिटल म्यूजियम और ओपन एयर लाइट एंड साउंड थिएटर: स्मारक परिसर में एक आधुनिक डिजिटल म्यूजियम भी बनेगा, जिसमें 22 थीम आधारित गैलरियां होंगी. इनमें 1857 की लड़ाई से जुड़े तथ्य, योद्धाओं की कहानियां, इंटरेक्टिव मॉडल, मल्टीमीडिया डिस्प्ले और प्रोजेक्शन मैपिंग शामिल होंगे. साथ ही एक ओपन-एयर लाइट एंड साउंड थिएटर में लगभग 2500 दर्शक एकसाथ 1857 की क्रांति पर आधारित विशेष शो से ऐतिहासिक घटनाओं का अनुभव कर सकेंगे.