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मशीनों को मात दे रहा है हाथों का जादू! गुजराती कारीगर देवजी भीमजी से जानें अपनी पुश्तैनी हैंडमेड साड़ियों की खासियत

फरीदाबाद: हरियाणा के फरीदाबाद में सूरजकुंड मेले में कला और संस्कृति का संगम देखने को मिल रहा है. इन्हीं में से कुछ ऐसे कलाकार भी हैं, जिन्होंने अपनी पुश्तैनी हैंडलूम कला को जीवित रखा और इसी कला की वजह से लाखों रुपये कमा रहे हैं. इसी कला के जरिए उन्हें कई अवॉर्ड मिल चुके हैं. इसी में से एक है खरेट देवजी भीमजी जो गुजरात से आए हुए हैं. अपनी पुश्तैनी विरासत में मिली हैंडलूम कला को वह एक नए मुकाम पर ले जा चुके हैं. बचपन से ही उन्होंने अपने पिता और दादा के साथ इस कला को सीखा और आज इस कला के जरिए देश-विदेश में अपना नाम रोशन कर रहे हैं. इतना ही नहीं खास बात ये भी है कि उन्होंने हजारों लोगों को रोजगार भी दिया है.

हैंडलूम साड़ी और कंबल: बातचीत के दौरान खरेट देवजी भीमजी ने बताया कि “यह कला उनकी पुश्तैनी कला है. लगभग हजारों सालों से चलती आ रही है. यही वजह है कि बचपन में ही मैंने इस कला को सीखा और इस कला के जरिए देश-विदेश तक में भी जा चुका हूं. हालांकि आज के जमाने में मशीन आ गई. जिससे प्रोडक्ट जल्दी तैयार हो जाता है. लेकिन इसके बावजूद भी आज हम अपनी हाथों से साड़ी, सूट, दुपट्टा, कंबल, इत्यादि बनाते हैं. जिस पर रंग बिरंगी डिजाइन भी की जाती है. इसमें किसी मशीन का इस्तेमाल नहीं होता और मेहनत ज्यादा होती है”.

भेड़ के बाल से बनाए जाते हैं प्रोडक्ट: भीमजी ने बताया कि ” इसके लिए सबसे पहले भेड़ के बाल को लाया जाता है. उसके जरिए हम इन चीजों को बनाते हैं, हालांकि इसमें मेहनत ज्यादा लगती है. काफी समय लग जाता है, लेकिन उसके बावजूद भी हम इस कला को लेकर दिन-प्रतिदिन आगे बढ़ रहे हैं. अब तक करीब 3500 से ज्यादा लोगों को मैंने रोजगार दिया है. हजारों लोगों को ये कला भी सीखा दी है”.

कला की दे चुके हैं ट्रेनिंग: उन्होंने बताया कि “UK की एक यूनिवर्सिटी में मैंने साढ़े 3 माह के बच्चों को इस कला की ट्रेनिंग भी दी है. इसके अलावा, अपने देश में कई ऐसे विश्वविद्यालय हैं, जहां पर मैंने बच्चों को कला सिखाई है. मुख्य रूप से नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फैशन टेक्नोलॉजी, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी शामिल है. इसके अलावा, भी कहीं ऐसे फैशन के क्षेत्र में बड़े लेवल पर काम कर रहे लोगों को भी मैं इस कला की ट्रेनिंग देता हूं वहीं समय-समय पर हमारे घर पर भी फैशन से जुड़े व्यक्ति छात्र आते हैं और ट्रेनिंग लेते हैं”.

राष्ट्रपति से पूरा परिवार सम्मानित: खरेट देवजी भीमजी बताते हैं कि “हैंडलूम के क्षेत्र में 3 अवॉर्ड होते हैं और वह तीनों अवार्ड मुझे मिल चुके हैं. जिसमें 2002 में पहला अवार्ड नेशनल मेरिट सर्टिफिकेट मिला. उसके बाद दूसरा अवार्ड आता है. नेशनल अवार्ड जो राष्ट्रपति द्वारा दिया जाता है, वह मुझे 2007 में मिला है. वहीं, हैंडलूम का सबसे बड़ा अवार्ड जो होता है, उसका नाम संत कबीर अवार्ड है. जो मुझे 2023 में मिला है. इसके अलावा, मेरे घर में 10 लोगों को राष्ट्रपति अवार्ड मिल चुका है. यही वजह है कि मैं अपने दोनों बेटे को भी इसी काम में लगाया है. एक बेटा जयपुर में फैशन इंस्टीट्यूट में पढ़ाई कर रहा है और दूसरा बेटा मेरे इस काम में अभी हाथ बटा रहा है”.

शुरू से ही सूरजकुंड मेले में पहुंच रहे: खरेट देवजी भीमजी आगे बताते हैं कि “जब से यह मेला शुरू हुआ, तब से इस मेले में मैं आ रहा हूं. हालांकि आज मेरी उम्र 54 साल है. लेकिन जब यह मेल पहली बार लगा, उस समय मैं छोटा था और अपने दादाजी और पिताजी के साथ आया था. लेकिन अब मेले का स्वरूप भी बदल चुका है और मेला भव्य स्तर पर हो गया है. ऐसे में इस मेले में अब हमारी कला को खूब पसंद किया जा रहा है. आज भी हाथों से बनाए गए इन चीजों को लोग खूब पसंद कर रहे हैं और बिक्री भी ज्यादा हो रही है”.

लाखों का सामान लेकर पहुंचे: खरेट देवजी भीमजी आगे बताते हैं कि “मेरे द्वारा बनाए गए सामानों की शुरुआत 1 हजार से शुरू हो जाती है. एक्सक्लूसिव साड़ी जिसका रेट 3 लाख 20 हजार है. वहीं मेरे द्वारा बनाए गए साड़ियों को विदेश के कई म्यूजियम में भी रखा गया है। और इसका श्रेय मेरे पूर्वज और भारत सरकार को जाता है क्योंकि बिना भारत सरकार की मदद से यह सब संभव नहीं हो पता हालांकि मेरी ख्वाहिश है कि मुझे पद्मश्री मिले इसके लिए मैं और भी ज्यादा मेहनत कर रहा हूं”.

देवजी की कारीगरी के मुरीद हुए लोग: प्रभावित हो रहे लोग वहीं, स्टॉल पर सामान लेने आई महिला रीना गुप्ता ने बताया कि “बहुत ही अच्छा प्रोडक्ट है और बहुत अच्छी कारीगरी की गई है और दूसरे कपड़ों से यह यूनिक है क्योंकि इसको हाथों से बनाया गया है. आज के जमाने में मशीनों का प्रयोग किया जाता है. लेकिन आज भी इन चीजों को यह कलाकार हाथों से बनाते हैं, जो काफी सुंदर, टिकाऊ और बढ़िया है”. इसके अलावा, स्टॉल पर आई हुई दूसरी महिला मनीष गुप्ता ने बताया कि” बहुत ही सुंदर प्रोडक्ट है और यह प्रोडक्ट हाथों से बनाया गया है और बारीकी से, खूबसूरती के साथ इसे बनाया गया है”.