चंडीगढ़ : प्राइवेट स्कूल संघ ने चिराग योजना की शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए निदेशालय द्वारा भेजी गई सूची में इस योजना के तहत पढ़ रहे गरीब बच्चों व उनके स्कूलों के नाम न आने पर शिक्षा विभाग के प्रति गहरी नाराजगी जाहिर की है और इसको शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही करार दिया है। इसके साथ ही प्राइवेट स्कूल संघ ने वंचित स्कूलों एवं बच्चों के नाम सूची में डालने की शिक्षा निदेशक से मांग की है और चिराग योजना का वर्तमान आधे सत्र का 72,07,464 रुपए की प्रतिपूर्ति राशि जारी करने के लिए प्राइवेट स्कूल संघ ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा व शिक्षा विभाग के अधिकारियों का आभार जताया है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष सत्यवान कुंडू, प्रांतीय महासचिव पवन राणा व रणधीर पूनिया, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट संजय धतरवाल, अशोक कुमार व कुलदीप यादव ने कहा कि शिक्षा विभाग ने शिक्षा का अधिकार (आर.टी.ई.) के तहत सत्र 2025-26 में कक्षा 5वीं से 8वीं तक पढ़ रहे प्रदेश के 213 स्कूलों के 1418 बच्चों की अप्रैल 2025 से सितम्बर 2025 तक यानी 6 महीने के 72,07,464 रुपए जारी करके सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को वैरीफिकेशन प्रक्रिया पूर्ण करके संबंधित स्कूलों को भुगतान करने का पत्र स्कूलों एवं बच्चों की सूची समेत जारी किया गया है।
सत्र 2025-26 की इस सूची में कुछ स्कूलों व इस योजना के तहत इनमें पढ़ रहे एक भी बच्चे का नाम नहीं है और ये सूची से वंचित स्कूल जब से चिराग योजना शुरू हुई थी तब से इस योजना के तहत बच्चों को पढ़ा रहे हैं और सत्र 2025-26 के तहत दाखिल बच्चों के भी सभी डॉक्यूमेंट ऑनलाइन किए हुए हैं लेकिन इसके बाद भी सूची से स्कूल का नाम गायब होना शिक्षा विभाग की लापरवाही को दर्शाता है। प्राइवेट स्कूल संघ मांग करता है कि जल्द से जल्द वंचित स्कूलों एवं बच्चों के नाम सूची में डाल कर इनका पैसा भी जारी किया जाए।
संघ के प्रदेश सचिव प्रदीप पूनिया, पैटर्न महावीर यादव व पूर्व महासचिव सुशील रंगा ने कहा कि शिक्षा विभाग की यह कोई पहली लापरवाही नहीं है इससे पहले भी 2808 स्कूलों में से बहुत से स्कूलों ने आर.टी.ई. की खाली सीटें दिखाने का प्रयास किया लेकिन जानकारी के अभाव में कुछ स्कूल फाइनल सबमिट नहीं कर पाए तो विभाग ने टैलीफोन, मेल या अन्य किसी भी जरिए से इन स्कूलो को कोई भी सूचना नहीं दी क्या विभाग का यह बताना फर्ज नहीं बनता था कि आपके स्कूल का फाइनल सबमिट नहीं हुआ लेकिन बिना सूचना दिए इन स्कूलों के एम.आई.एस. पोर्टल बंद कर दिए और 30 हजार से 1 लाख रुपए तक जुर्माना लगा दिया और 10 महीनों से इन स्कूलों के पोर्टल बंद है जिस कारण से इनके बच्चों का ऑनलाइन दाखिला नहीं हुआ है। अगर कोई अभिभावक नए सैशन में स्कूल बदलना चाहेगा तो बच्चे को ऑनलाइन एस.एल.सी. कहां से मिलेगी क्योंकि पोर्टल बंद होने के बाद ऑनलाइन दाखिला तो हो नहीं सका। इसलिए प्राइवेट स्कूल संघ ने इन स्कूलों के भी एम.आई.एस. पोर्टल खोलने एवं 134ए का बकाया पैसा देने की मांग भी शिक्षा विभाग के निदेशक व शिक्षा मंत्री से की है।

















