फरीदाबाद: जिला उपभोक्ता फोरम ने एक रेस्टोरेंट को ग्राहक को मुफ्त पीने का पानी न देकर बोतलबंद पानी खरीदने के लिए मजबूर करने का दोषी मानते हुए उस पर तीन हजार रुपये जुर्माना लगाया है। आयोग ने इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत सेवा में कमी करार दिया है।
आयोग की पीठ ने उपभोक्ता आकाश शर्मा की शिकायत स्वीकार करते हुए रेस्टोरेंट को मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए 3000 रुपये मुआवजा देने तथा बोतलबंद पानी के नाम पर वसूले गए 40 रुपये वापस करने का आदेश दिया है। शिकायतकर्ता आकाश शर्मा ने बताया कि वह 18 जून 2025 को अपने दोस्तों के साथ एमएस गार्डन ग्रिल्स रेस्टोरेंट में डिनर करने गया था। खाना खाने के दौरान जब उसने पीने का पानी मांगा तो रेस्टोरेंट स्टाफ ने कहा कि केवल बोतलबंद पानी ही उपलब्ध है, जिसे खरीदना होगा।
शिकायतकर्ता ने स्टाफ और मैनेजर को बताया कि ग्राहकों को बोतलबंद पानी खरीदने के लिए मजबूर करना अवैध और नियमों के खिलाफ है, लेकिन रेस्टोरेंट प्रबंधन अपने फैसले पर अड़ा रहा। मजबूरी में उसे 40 रुपये में पानी की दो बोतलें खरीदनी पड़ीं। इसके बाद शिकायतकर्ता ने सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार की शिकायत के साथ जिला उपभोक्ता फोरम का रुख किया।
फोरम ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए रेस्टोरेंट को नोटिस जारी किया। नोटिस जारी होने के बावजूद रेस्टोरेंट की ओर से कोई भी आयोग के समक्ष पेश नहीं हुआ, जिसके चलते मामले में एकतरफा कार्रवाई की गई। फोरम ने अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा पेश शपथपत्र, बोतलबंद पानी का बिल और नोटिस की सेवा के प्रमाण रिकाॅर्ड पर मौजूद हैं और विपक्षी पक्ष ने न तो आरोपों का खंडन किया और न ही कोई साक्ष्य पेश किया।






















