हरियाणा की एकीकृत आपातकालीन सेवा हरियाणा-112 ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था में एक नई इबारत लिख दी है। पुलिस, एम्बुलेंस और फायर सेवाओं को एक मंच पर लाने वाली इस प्रणाली ने न केवल तकनीक के स्तर पर बल्कि जनता के भरोसे के मामले में भी नया कीर्तिमान स्थापित किया है। दिसंबर 2025 तक 112 पर 2.75 करोड़ से अधिक कॉल दर्ज होना इस बात का प्रमाण है कि संकट की घड़ी में अब हरियाणा की जनता सबसे पहले 112 को ही याद करती है।
12 जुलाई, 2021 को शुरू हुई यह सेवा महज़ एक हेल्पलाइन नहीं, बल्कि आज एक तेज़, भरोसेमंद और तकनीक-संचालित सुरक्षा तंत्र बन चुकी है। डीजीपी अजय सिंघल ने सोमवार को यहां बताया कि हरियाणा 112 की सबसे बड़ी उपलब्धि इसका तेज़ होता रेस्पॉन्स टाइम है। जुलाई 2021 में जहां पुलिस ईआरवी का औसत प्रतिक्रिया समय 16 मिनट 14 सेकंड था, वहीं दिसंबर 2025 तक इसे घटाकर 9 मिनट 33 सेकंड कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि हरियाणा 112 पर जनता का भरोसा केवल कॉल की संख्या से नहीं, बल्कि कॉलर सैटिस्फैक्शन रिपोर्ट से भी झलकता है। 2025 के अंत तक किए गए विश्लेषण में 92.60 प्रतिशत कॉलर्स ने सेवाओं को संतोषजनक बताया। यह सफलता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब पुलिस, फायर, मेडिकल, ट्रैफिक, महिला हेल्पलाइन, चिल्ड्रन हेल्पलाइन, साइबर क्राइम और डिज़ास्टर मैनेजमेंट जैसी सभी सेवाएं एक ही नंबर पर उपलब्ध हैं। अब किसी संकट में अलग-अलग नंबर ढूंढने की जरूरत नहीं। बस – 112 डायल करना ही काफी है।
पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल का कहना है कि हरियाणा 112 की उपलब्धियां राज्य की आपातकालीन सेवाओं के इतिहास में मील का पत्थर हैं। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य है कि 2026 के अंत तक हरियाणा 112 को दुनिया के सबसे तेज़ आपातकालीन रिस्पॉन्स मॉडल्स में शामिल किया जाए। इसके लिए सिस्टम को पूरी तरह ऑटो-डिस्पैच, एआई सपोर्टेड और रियल-टाइम परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग से लैस किया जा रहा है, ताकि ‘गोल्डन मिनट्स’ में सहायता पहुंचाई जा सके।
हरियाणा 112 अब तकनीकी क्रांति के दौर में प्रवेश कर चुका है। जुलाई 2025 में पंचकूला में ऑटो डिस्पैच पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया, जिसमें एसओएस कॉल मिलते ही बिना मानवीय हस्तक्षेप के नजदीकी ईआरवी स्वतः रवाना हो जाती है। पायलट की सफलता के बाद इसे अन्य जिलों में लागू करने की तैयारी है। इसके साथ ही जीपीएस आधारित ईआरवी परफॉर्मेंस ऑडिट मॉड्यूल लागू किया गया है, जो हर घटना के बाद वाहन की गति, दूरी और प्रतिक्रिया समय का स्वतः विश्लेषण करता है। इससे जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों बढ़ी हैं।
सड़क दुर्घटनाओं में त्वरित चिकित्सा सहायता के लिए निजी अस्पतालों की एम्बुलेंस को भी 112 प्रणाली से जोड़ा गया है। फिलहाल पार्क हॉस्पिटल ग्रुप की पांच एम्बुलेंस इस पायलट मॉडल का हिस्सा हैं, जो दुर्घटना पीड़ितों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। एडीजीपी हरदीप दून के अनुसार, आने वाले समय में ईआरवी की संख्या, रूटिंग सिस्टम और तकनीकी क्षमताओं को और मजबूत किया जाएगा। यदि यही गति बनी रही, तो हरियाणा 112 न केवल देश बल्कि वैश्विक स्तर पर एक आदर्श आपातकालीन सेवा मॉडल बनकर उभरेगा।

















