पशु मेले का ताबड़तोड़ आकर्षण ‘अतिबल’, करोड़ों का ऑफर ठुकराया

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कुरुक्षेत्र : हरियाणा के ऐतिहासिक शहर कुरुक्षेत्र में आयोजित केडीबी पशु मेले में इस बार एक घोड़ा खास आकर्षण का केंद्र बना रहा। मारवाड़ी नस्ल का यह घोड़ा ‘अतिबल’ अपनी शानदार कद-काठी, चमकदार रंग और संतुलित चाल के कारण दर्शकों के साथ-साथ विशेषज्ञों की भी निगाहों में छाया रहा। अतिबल की कीमत को लेकर चर्चाएं तब और तेज हो गईं, जब इसके लिए गुजरात के अहमदाबाद के एक व्यापारी द्वारा ₹1 करोड़ रुपये का ऑफर दिया गया, जिसे मालिक ने साफ तौर पर ठुकरा दिया।

अतिबल के मालिक एडवोकेट कपिल जगत ने बताया कि यह घोड़ा दुनिया के सबसे महंगे टॉप क्लास घोड़ों में शामिल ‘भारत रत्न’ का बेटा है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब ₹29 करोड़ रुपये बताई जाती है। अतिबल की मां भी शुद्ध देसी मारवाड़ी नस्ल की घोड़ी है, जो वर्तमान में उनके फार्म पर ही मौजूद है।एडवोकेट कपिल ने बताया कि उनके परिवार में घोड़े पालने की परंपरा दादा-परदादा के समय से चली आ रही है। उनके परदादा चौ. फौजा राम विभाजन के समय पाकिस्तान से भारत आए थे और अपने साथ कई उम्दा नस्ल के घोड़े लेकर गुहला-चीका क्षेत्र में बस गए थे। वर्तमान में यह परिवार घोड़ा पालन की पांचवीं पीढ़ी है।

अतिबल के रख-रखाव पर विशेष ध्यान दिया जाता है। रोजाना उसे नहलाने के बाद करीब एक घंटे तक तेल से मालिश कराई जाती है। हर रोज सुबह-शाम हरा घास डाला जाता है, जबकि दोपहर में उसे फार्म में खुला छोड़ा जाता है। सर्दियों में अतिबल को 3 किलो बाजरा और 2 किलो उबले चने खिलाए जाते हैं, वहीं गर्मियों में डाइट बदलकर उबले जौ और जई ओट्स दिए जाते हैं। इसके साथ ही अतिबल रोजाना 100 से 150 ग्राम देसी घी की चूरी, जिसमें बादाम भी मिलाए जाते हैं, बड़े चाव से खाता है।

एडवोकेट कपिल ने बताया कि वे भगवान हनुमान में गहरी आस्था रखते हैं और उनकी कृपा से ही उन्हें यह घोड़ा प्राप्त हुआ, इसलिए हनुमानजी के एक नाम ‘अतिबल’ पर घोड़े का नाम रखा गया। 34 महीने का अतिबल पहले भी मेलों में ब्यूटी कॉन्टेस्ट में सेकेंड चैंपियन रह चुका है। काले रंग के इस घोड़े के माथे पर सफेद निशान उसकी अलग पहचान है। कपिल जगत का कहना है कि अतिबल उनके लिए सिर्फ एक घोड़ा नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह है, इसलिए चाहे जितनी भी कीमत लगे, वे इसे बेचने का कोई इरादा नहीं रखते।