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CM सैनी का ट्रांसफर पावर मांगने वाले मंत्रियों को झटका

चंडीगढ़।

हरियाणा में कर्मचारियों के ट्रांसफर का हक मांगने वाले मंत्रियों को CM नायब सैनी ने बड़ा झटका दिया है। CM ने कहा कि हमारे तो सारे ट्रांसफर ऑनलाइन होते हैं, उसमें कैसे किसी को पावर देंगे। अगर किसी को ट्रांसफर कराना है तो ऑनलाइन अप्लाई करना चाहिए। फिर भी किसी को दिक्कत है तो DC के नेतृत्व में कमेटी बनी है, वहां पर कर्मचारी अपने ट्रांसफर की अर्जी दे सकता है, जहां उसकी समस्या दूर की जाएगी।

बता दें कि ग्रुप B तक के ट्रांसफर की पावर को लेकर मंत्री सीएम सैनी से मिले थे। उस वक्त भी सीएम ने उन्हें कोई ठोस जवाब नहीं दिया था। अब सीएम ने पल्ला झाड़ लिया है। प्रदेश सरकार में 11 कैबिनेट और 2 राज्य मंत्री हैं।

ग्रुप-4 के कर्मचारी का भी ट्रांसफर नहीं कर सकते मंत्री राज्य में मंत्रियों को ट्रांसफर के मामले में कोई अधिकार नहीं है। वह दर्जा 4 कर्मचारी को तक नहीं बदल सकते। सारे ट्रांसफर CM ऑफिस से होते हैं। यह सारा काम मुख्यमंत्री ऑफिस में नियुक्त OSD लेवल का HCS अधिकारी देखता है। प्रदेश में ट्रांसफर-पोस्टिंग का पूरा अधिकार मुख्यमंत्री के पास है। अगर किसी कर्मचारी या अधिकारी की ट्रांसफर करना हो तो पहले मुख्यमंत्री से पूछना पड़ता है, उसके बाद OSD इसके आदेश जारी करते हैं।

मंत्रियों ने कहा था- हमारे साथ विधायकों को भी दिक्कत

CM से मुलाकात के दौरान मंत्रियों ने सीएम को कहा था कि उन्हें किसी कर्मचारी के ट्रांसफर के लिए बहुत मशक्कत करनी पड़ती है। मुख्यमंत्री से पूछने और OSD से आदेश देने में काफी समय लग जाता है। विधायकों को भी यही दिक्कत आ रही है। ऐसे में उनके अधिकारों के प्रति गलत मैसेज जा रहा है। उन्होंने OSD को ही अधिकार देने को लेकर भी नाराजगी जताई थी। मंत्रियों ने कहा था कि सीनियर अधिकारियों के फैसले सीएम करें लेकिन ग्रुप बी तक के कर्मचारियों के ट्रांसफर का अधिकार मंत्रियों को मिलना चाहिए।

हरियाणा सरकार में मंत्रियों को पहले साल के भीतर एक महीने ग्रुप बी तक ट्रांसफर के अधिकार मिलते थे। यह अधिकार 2019 में दूसरे टर्म की सरकार में तत्कालीन CM मनोहर लाल को भी दिए। हालांकि मनोहर लाल ने 2019 में मंत्रियों को 25 नवंबर से 10 दिसंबर तक तबादलों की पावर दी थी। इसके आगे के 4 साल यानी 2020 से 2024 तक मंत्रियों के पास कोई अधिकार नहीं थे। दूसरे टर्म के अंत में नायब सैनी सीएम बन गए, लेकिन ट्रांसफर के अधिकारों की यह प्रक्रिया ऐसे ही चली आ रही है।