बहादुरगढ़ : रोहतक लोकसभा से कांग्रेस के सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने मनरेगा के नाम बदलने को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि भगवान राम भी देख रहे होंगे कि मेरा नाम मर्यादा से नहीं लिया जा रहा। अगर योजना का नाम राम के नाम से करना था तो कम से कम बजट तो बढ़ा देना चाहिए था। वह हमारी समझ में कुछ तो आता।लेकिन यहां ऐसा लग रहा है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का नाम लेने में बीजेपी को शर्म आ रही है। सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा रोहतक में आयोजित एक प्रेस वार्ता में बोल रहे थे।
हुड्डा ने कहा कि केंद्र में भाजपा की सरकार बनते ही 2015 में ही मनरेगा की योजना को बंद करने की साजिश शुरू हो गई थी। इन्होंने मनरेगा का नाम ही नहीं बदला पूरी योजना ही बदल दी है। हरियाणा में 2024 में 8 लाख लोगों ने 100 दिन के काम के लिए रजिस्ट्रेशन किया लेकिन महज 2100 लोगों को ही काम दिया गया। यह इस योजना को कमजोर करने वाला कदम है। कांग्रेस पार्टी इस कदम का विरोध करती है। देश के मजदूर भी अब इस सच्चाई को जान चुके हैं। कांग्रेस पार्टी एक महीने तक पूरे देश में इसकी विरोध में कार्यक्रम करेगी और संसद से सड़क तक इस लड़ाई को लड़ा जाएगा।
दीपेंद्र हुड्डा ने हरियाणा सरकार पर भी किया कटाक्ष
प्रेस कांफ्रेंस के दौरान दीपेंद्र हुड्डा ने हरियाणा सरकार पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि हरियाणा प्रदेश में कोई निवेश नहीं हुआ, केवल भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला है। भाजपा के शासनकाल में लोग तो कष्ट काट रहे हैं और भाजपा के विधायक कॉलोनी काट रहे हैं। प्रदेश में ऐसा कोई शहर नहीं है जहां भाजपा के लोग कॉलोनी ना काट रहे हो। जहां विधायक नहीं है वहां यह काम पूर्व विधायकों द्वारा किया जा रहा है। मुख्यमंत्री नायब सैनी को बताना चाहिए कि कौन सा विधायक कॉलोनी काटने में नहीं जुटा हुआ है। जहां तक भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर आरोप है वह सरासर निराधार है किसी भी जांच एजेंसी ने कोई भी पैसे के लेनदेन का मामला साबित नहीं किया है।यह सिर्फ राजनीतिक देश के चलते हो रहा है।
वहीं पश्चिम बंगाल में ईडी की रेड को लेकर दीपेंद्र हुड्डा बोले यह भारतीय जनता पार्टी की कार्यशैली है और जो भी राजनीतिक विरोधी है, उनके खिलाफ जांच एजेंसियों को इशारा कार्यवाही करवाई जा रही है ।चाहे फिर वह लालू प्रसाद का परिवार हो या कांग्रेसी नेता और जो भी नेता भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो जाता है उनकी सभी जांच वापस हो जाती है। ऐसे में अब जनता को खुद ही सोचना पड़ेगा।

















