भिवानी। महम रोड स्थित पुराने जलघर के पांच टैंकों में नहरी पानी के साथ आने वाली मिट्टी (गाद) और जलीय पौधों की वजह से पानी का स्वाद बिगड़ गया है और भंडारण क्षमता 60 फीसदी तक घट चुकी है। टैंकों में मरे हुए पक्षी भी पड़े हैं जिससे फिल्टर में गंदगी भर गया है और घरों तक दूषित पानी पहुंच रहा है। डबल क्लोरिनेशन के बावजूद पानी की शुद्धता में सुधार नहीं हो रहा है।
ये है पुराना जलघर टैंकों की पानी भंडारण क्षमता
नल से आने वाला पानी मटमैला और बदबूदार है। कई जगह सीवर लाइनों की क्रॉसिंग के कारण काले रंग का दूषित पानी घरों तक पहुंच रहा है। विभाग क्लोरिनेशन के बाद बूस्टरों से आपूर्ति कर रहा है लेकिन पानी पूरी तरह शुद्ध नहीं है। इससे पेट के विकार बढ़ रहे हैं। डॉक्टर पानी उबालकर पीने की सलाह देते हैं लेकिन इतना दूषित पानी उबालने पर भी असर नहीं होता।
अधिकांश शहर दूषित पानी की आपूर्ति झेल रहा है। विभाग पेयजल परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है लेकिन पानी की आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ। गर्मियों में सप्ताह भर तक पानी नहीं आता जबकि सर्दियों में रोजाना आने पर भी शुद्ध जल नहीं मिलता। हैंडपंप का पानी अब पेयजल आपूर्ति के पानी से बेहतर है क्योंकि इसमें मरे हुए मवेशियों की गंद और सीवर का पानी नहीं आता।
शहरवासी दूषित पानी पीने पर मजबूर हैं जबकि अधिकारियों की सेहत पर कोई असर नहीं है। लोग पानी को लेकर सड़कों पर उतर प्रदर्शन कर जाम तक लगा चुके हैं लेकिन अधिकारियों के पास आश्वासन के सिवा कोई उपाय नहीं है। पेयजल आपूर्ति में आने वाला पानी पीने लायक नहीं और इसे किसी भी कार्य में इस्तेमाल करना भी सुरक्षित नहीं है। व्यवस्था और पाइप लाइनों में व्यापक सुधार की जरूरत है।

















