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WhatsApp-Insta के दौर में भी ‘खतों की खुशबू’ बरकरार: करनाल में डाक टिकटों का अनूठा मेला, टिकटों में कैद दिखा सदियों का इतिहास

करनाल: करनाल में डाक विभाग की ओर से डाक टिकट प्रदर्शनी का आयोजन किया गया. इस दौरान शहरवासियों को देश की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से विभाग ने रूबरू कराया. प्रदर्शनी में स्वतंत्रता संग्राम, महान विभूतियों, सांस्कृतिक धरोहरों, वन्य जीवों और ऐतिहासिक स्थलों पर आधारित दुर्लभ व आकर्षक डाक टिकटों को प्रदर्शित किया गया. यह आयोजन केवल शौक़ीन संग्रहकर्ताओं के लिए ही नहीं, बल्कि आम जनता और युवाओं के लिए भी ज्ञानवर्धक अनुभव साबित हुआ.

बच्चों और युवाओं में दिखा खास उत्साह : प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को डाक टिकटों के माध्यम से इतिहास और संस्कृति से जोड़ना रहा. इस दौरान बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं यहां पहुंचे और उन्होंने डाक टिकटों की दुनिया को नज़दीक से जाना. कई बच्चों ने पहली बार जाना कि एक छोटा सा टिकट भी देश की बड़ी कहानी बयां कर सकता है.

पोस्ट मास्टर जनरल सचिन किशोर ने दी जानकारी: हरियाणा के पोस्ट मास्टर जनरल सचिन किशोर ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया. उन्होंने कहा कि, “भले ही आज तकनीक ने संवाद के तरीके बदल दिए हों, लेकिन पत्र लेखन की भावनात्मक गहराई आज भी अनमोल है. पहले टेक्नोलॉजी नहीं थी, अब तकनीक एक पुल का काम कर रही है. लेकिन हाथ से लिखा पत्र दिलों को जिस तरह जोड़ता है, वैसा जुड़ाव डिजिटल संदेशों में नहीं मिल पाता. डाक टिकट केवल डाक सेवा का हिस्सा नहीं, बल्कि देश के इतिहास, विकास और सांस्कृतिक पहचान के जीवंत दस्तावेज हैं.”

कर्ण लेक पर जारी हुआ स्पेशल कवर : इस खास अवसर पर डाक विभाग ने करनाल की प्रसिद्ध कर्ण लेक पर एक विशेष आवरण (स्पेशल कवर) भी जारी किया. इससे न केवल करनाल की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होगी, बल्कि फिलेटली (डाक टिकट संग्रह) के माध्यम से शहर की ऐतिहासिक छवि भी दूर-दूर तक पहुंचेगी.

डाक व्यवस्था का इतिहास और आधुनिक सेवाएं भी प्रदर्शित :प्रदर्शनी में ऐसे स्टॉल भी लगाए गए, जहां लोगों को डाक सेवा के इतिहास से लेकर आधुनिक डिजिटल सेवाओं तक की जानकारी दी गई. इससे यह संदेश गया कि डाक विभाग समय के साथ कदम मिलाते हुए परंपरा और आधुनिकता का संतुलन बनाए हुए है.

“पत्रों में भावनाओं की गर्माहट अलग होती है”: सचिन किशोर ने खासतौर पर युवाओं से अपील की कि वे कभी-कभी पत्र लिखने की परंपरा को अपनाएं. उन्होंने कहा कि, “व्हाट्सएप और सोशल मीडिया के दौर में भी लिखे गए शब्दों का भावनात्मक महत्व अलग होता है- वह रिश्तों में आत्मीयता और संवेदनशीलता को गहराई देता है.”

शहरवासियों ने बताया ज्ञानवर्धक और यादगार आयोजन : प्रदर्शनी देखने आए नागरिकों और युवाओं ने इसे बेहद रोचक और जानकारी से भरपूर बताया. कई युवाओं ने कहा कि उन्होंने अब तक डाक टिकटों और पत्रों के बारे में केवल किताबों में पढ़ा था, लेकिन आज उन्हें इतिहास को अपनी आंखों के सामने देखने का मौका मिला.