अंबाला: गांव शाहपुर में आलू की फसल इन दिनों महज 4 रुपये किलो के भाव बिक रही है. इस बेहद कम कीमत ने किसानों को गहरे संकट में डाल दिया है. लागत. मेहनत और समय के मुकाबले मिलने वाला यह दाम किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है. कई किसानों का कहना है कि इस कीमत पर तो खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है.
10 एकड़ में खेती. फिर भी मुनाफा नहीं
किसान कुलदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने 10 एकड़ जमीन पर आलू की खेती की थी. अक्टूबर महीने में बिजाई की गई थी लेकिन फसल में बीमारी लगने से पैदावार प्रभावित हुई. अब जब फसल मंडी में पहुंची तो 4 रुपये किलो का भाव मिल रहा है. उन्होंने कहा कि इससे न तो लागत निकल पा रही है और न ही परिवार का खर्च चल पा रहा है.
एक एकड़ पर 50 हजार खर्च. आमदनी कम
किसान बलजीत सिंह ने बताया कि आलू की खेती में प्रति एकड़ 40 से 50 हजार रुपये तक का खर्च आता है. लेकिन मौजूदा हालात में एक एकड़ की फसल बेचकर महज 35 हजार रुपये ही मिल पा रहे हैं. मजदूरों की दिहाड़ी उन्हें अपनी जेब से देनी पड़ रही है. ऐसे में आलू की खेती पूरी तरह घाटे का सौदा बन गई है.
मौसम और बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें
किसानों ने बताया कि इस बार मौसम की मार भी फसल पर भारी पड़ी. बीते दिनों हुई बारिश से आलू की फसल को काफी नुकसान हुआ. इससे पहले आई बाढ़ और बरसात के कारण भी खेती प्रभावित हुई थी. किसानों का कहना है कि पिछली बार का मुआवजा अभी तक नहीं मिला है और अब दोबारा फसल सस्ते दामों में बिक रही है.
बीमारी और दवाइयों का बढ़ता खर्च
किसान अवतार सैनी ने बताया कि वह 8 एकड़ जमीन पर आलू की खेती करते हैं. आलू की फसल में बीमारी से बचाव के लिए दवाइयों का छिड़काव जरूरी होता है. लेकिन अब दवाइयों और रखरखाव पर होने वाला खर्च भी नहीं निकल पा रहा है. जितना खर्च आ रहा है उतने दाम फसल बेचने पर नहीं मिल रहे.
भावांतर योजना से नहीं मिल रहा लाभ
किसानों ने सरकार पर भावांतर योजना का लाभ समय पर न देने का आरोप लगाया है. किसान दर्शन लाल ने बताया कि वह 7 एकड़ में आलू की खेती करते हैं. पिछले साल के मुकाबले इस बार मुनाफा काफी कम है. टांगरी नदी में आई बाढ़ से पहले फसलें खराब हुईं और अब आलू की पैदावार भी कमजोर रही है.
बीच के लोग कमा रहे मुनाफा
किसानों का कहना है कि आलू को तैयार होने में 70 से 75 दिन का समय लगता है. बाजार में यही आलू 10 से 15 रुपये किलो बिक रहा है लेकिन किसानों से 4 रुपये किलो में खरीदा जा रहा है. सारा मुनाफा बिचौलिये कमा रहे हैं. किसानों ने सरकार से मांग की है कि भावांतर योजना के तहत अनुदान समय पर दिया जाए और आलू की बीमारी से बचाव के लिए ठोस इंतजाम किए जाएं.
















