राजस्थान में साइबर ठगी के आरोपियों से अवैध रूप से पैसे वसूलने और कैश के साथ पकड़े जाने के मामले में सस्पेंड किए गए पुलिसकर्मियों की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं। राजस्थान एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) मुख्यालय ने इस पूरे मामले में एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए हैं। अब एसीबी की ओर से तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ औपचारिक रूप से केस दर्ज किया जाएगा।
एसीबी नागौर की ओर से मुख्यालय को जिन पुलिसकर्मियों के नाम भेजे गए थे, उनमें पीएसआई सुरेंद्र, हेड कॉन्स्टेबल वीरेंद्र, कॉन्स्टेबल जगजीत सिंह सहित अन्य शामिल थे। इन सभी पर साइबर ठगी के आरोपियों से पैसे वसूलने और संदिग्ध कैश लेन-देन के गंभीर आरोप लगे हैं।
नागौर एसीबी के डीआईजी महावीर सिंह के अनुसार, जयपुर स्थित एसीबी मुख्यालय से केस दर्ज करने के आदेश मिल चुके हैं। उन्होंने बताया कि गुरुवार शाम तक एफआईआर दर्ज कर ली जाएगी। एफआईआर के बाद एसीबी आरोपित पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी भी कर सकती है। साथ ही, जो अन्य लोग संदिग्ध भूमिका में हैं, उन्हें भी जांच में शामिल किया जाएगा। इसके बाद मामले की गहन जांच कर आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
ACB कार्रवाई के समानांतर सिरसा पुलिस ने भी इन पुलिसकर्मियों के सस्पेंड होने के बाद विभागीय जांच शुरू कर दी है। इस जांच की जिम्मेदारी डीएसपी आदर्श दीप सिंह को सौंपी गई है, जो पूरे प्रकरण की आंतरिक जांच कर रहे हैं।
पीएसआई सुरेंद्र एक एक्स-सर्विसमैन हैं और करीब सात महीने पहले ही साइबर थाने में तैनात हुए थे। वह हिसार जिले के धिकताना गांव के रहने वाले हैं। उनके पास अपनी निजी गाड़ी है, जो अक्सर थाने में खड़ी रहती थी, हालांकि वे ज्यादातर बस से ही आना-जाना करते थे। वहीं, हेड कॉन्स्टेबल वीरेंद्र और कॉन्स्टेबल जगजीत सिंह क्रमशः हिसार और फतेहाबाद के रहने वाले हैं। इन दोनों के पास भी निजी वाहन हैं और वे कभी बस तो कभी गाड़ी से ड्यूटी पर आते-जाते थे। तीनों की पोस्टिंग करीब एक साल पहले ही हुई थी।

















