Advertisement

जींद के ‘मरिची आर्ट’ वाले गुरुजी: सरकारी स्कूल के बच्चों को बना रहे कलाकार, संवार रहे सैकड़ों नौनिहालों का भविष्य

जींद: आर्ट महज ड्रॉइंग नहीं होती…बल्कि यह सोचने, समझने और खुद पर भरोसा करना सीखाती है. आर्ट आत्मविश्वास बढ़ाती है. इस बात को सच कर दिखाया है. हरियाणा के जींद जिला के गोबिंदपुरा राजकीय मिडिल स्कूल के आर्ट टीचर नवीन मरीचि ने. ये आज आर्ट के जरिए बच्चों का न सिर्फ भविष्य बना रहे हैं, बल्कि बच्चों को आर्ट में भविष्य तलाशने की प्रेरणा भी दे रहे हैं. साथ ही ये आर्ट के जरिए बच्चों की शिक्षा को भी आसान बना रहे हैं.

आर्ट में भविष्य: नवीन जब क्लास में होते हैं, तो बच्चों में एक अलग उत्साह होता है. बच्चे खुद-ब-खुद चीजों को समझने की कोशिश करने लगते हैं. या फिर यूं कहें कि बच्चों को नवीन के सीखाने का तरीका काफी सहज और इंट्रेस्टिंग लगता है. शायद यही कारण है कि अब तक नवीन ने कई बच्चों को आर्ट के क्षेत्र में ऐसी महारत हासिल करा दी है कि वो अलग-अलग राज्यों ही नहीं बल्कि दूसरे देश में अच्छी कंपनी में आर्ट के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आज जिन बच्चों को नवीन आर्ट सीखा रहे हैं, उनका लक्ष्य आर्ट के क्षेत्र में अपना भविष्य संवारना है.

प्राइवेट स्कूलों से की थी शुरुआत: नवीन ने बताया कि, “कला सिर्फ एक विषय नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति, अवलोकन और समग्र विकास का सशक्त माध्यम है, जो बच्चों के जीवन को नई दिशा देता है. शुरुआत में मैंने प्राइवेट स्कूलों में काम किया, लेकिन वहां मुझे वह पहचान नहीं मिल सकी, जैसा मैं सोचता था. इसके बाद मैंने सरकारी नौकरी की तैयारी की. सरकारी नौकरी मिलने के बाद मैंने बच्चों के भविष्य में अपना भविष्य तलाशने की कोशिश की. शुरुआत में दिक्कतें आई, इसके बावजूद मैंने कभी अपने काम से समझौता नहीं किया. आज मेरे कई छात्र देश के अलग-अलग हिस्सों में अच्छी जगहों पर काम कर रहे हैं, जो मेरे लिए गर्व की बात है. साथ ही ये मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है.”

कौन हैं नवीन: दरअसल, नवीन मारिची ने चंडीगढ़ के प्रतिष्ठित गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट से बीएफए और एमएफए की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने दो साल तक बीएफए प्रवेश परीक्षा की कोचिंग दी और एनआईडी और निफ्ट जैसी राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं के विद्यार्थियों को मार्गदर्शन किया. इस बारे में नवीन बताते हैं कि, “इस दौरान मैंने केवल परीक्षा की तैयारी नहीं करवाई, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास और कला के प्रति स्पष्ट दृष्टिकोण विकसित करने पर ध्यान दिया.”

राष्ट्रीय स्तर का है अनुभव: शिक्षण के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए उन्होंने केवीएस परीक्षा उत्तीर्ण की और पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, कन्नूर (केरल) में कला अध्यापक के रूप में सेवाएं दीं. नवीन ने बताया कि, “राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्रणाली में काम करने से मुझे बच्चों की सोच और प्रतिभा को और गहराई से समझने का अवसर मिला. इसके बाद मैंने डीएवी स्कूल, टोहाना में साढ़े चार वर्षों तक कला अध्यापक के तौर पर काम किया.”

बच्चों में भी आया सुधार:स्कूल की हेड टीचर नीलम खटकड़ ने कहा, “नवीन सर ने बच्चों में कला के प्रति लगन और रचनात्मक सोच को जो बढ़ावा दिया है, वह काबिले तारीफ है.” वहीं, बच्चों से बातचीत में भी यह देखा गया कि वे कला को अब केवल शौक नहीं, बल्कि करियर के रूप में देखने लगे हैं. साथ ही बच्चे भी नवीन मारिची की तारीफ करते नजर आया. बच्चे बताते हैं कि, “हमें नवीन सर का बताने का, सीखाने का तरीका बेहद पसंद आता है.”

वहीं, हरियाणा सरकार द्वारा आयोजित रंगोत्सव प्रतियोगिता में शिक्षकों की श्रेणी में दो बार प्रथम स्थान प्राप्त करना उनकी मेहनत और कला शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है. इसके साथ ही जिन बच्चों को नवीन सीखा रहे हैं, उन बच्चों में कला के प्रति उत्साह देखकर ये साफ पता चलता है कि नवीन की मेहनत रंग ला रही है.