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HAU की आरती ने रचा इतिहास! जापान में PhD के लिए चयन, टोक्यो यूनिवर्सिटी उठाएगी करोड़ों का खर्च

हिसार: चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (हकृवि) के कॉलेज ऑफ बायोटेक्नोलॉजी की छात्रा आरती खिप्पल का टोक्यो यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर, जापान में पीएचडी कार्यक्रम के लिए चयन हुआ है. यह चयन विश्वविद्यालय और टोक्यो यूनिवर्सिटी के बीच हुए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) के तहत हुआ है, जो हकृवि के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है.

जापान की यूनिवर्सिटी उठाएगी पूरा खर्च: पीएचडी के दौरान आरती की पढ़ाई, छात्रवृत्ति तथा रहने से संबंधित सभी खर्च टोक्यो यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर, जापान द्वारा वहन किया जाएगा. आरती कॉलेज ऑफ बायोटेक्नोलॉजी की पहली छात्रा हैं, जिनका इस अंतरराष्ट्रीय पीएचडी कार्यक्रम के लिए चयन हुआ है, जिससे विश्वविद्यालय का नाम वैश्विक स्तर पर और सुदृढ़ हुआ है.

कुलपति ने दी बधाई: हकृवि के कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज ने आरती खिप्पल को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की. उन्होंने कहा कि, “हकृवि विश्व स्तरीय विश्वविद्यालयों में अपनी पहचान बना चुका है. यहां के विद्यार्थी न केवल विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, बल्कि विदेशी छात्र भी यहां अध्ययन के लिए आ रहे हैं.”

जापान दौरे से मिले नए शैक्षणिक अवसर: कुलपति प्रो. काम्बोज ने बताया कि वे हाल ही में जापान के दौरे से लौटे हैं, जिसके परिणामस्वरूप दोनों देशों के विश्वविद्यालयों के बीच शिक्षा, शोध और इंटर्नशिप के नए अवसर सृजित हुए हैं. आरती का चयन इसी शैक्षणिक सहयोग का सकारात्मक परिणाम है.

मॉलिक्यूलर साइटोजेनेटिक्स में करेंगी शोध: स्नातकोत्तर शिक्षा अधिष्ठाता डॉ. रमेश यादव ने बताया कि, “आरती इंटरनेशनल एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के अंतर्गत मॉलिक्यूलर साइटोजेनेटिक्स विषय पर शोध करेंगी. उनके शोध का मार्गदर्शन टोक्यो यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर के प्रो. इरीए केनजी तथा डॉ. बाबिल द्वारा किया जाएगा.”

स्नातकोत्तर में किया महत्वपूर्ण शोध कार्य: आरती ने अपनी स्नातकोत्तर शिक्षा आणविक जीवविज्ञान एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग में सह प्राध्यापक डॉ. शिखा यशवीर के मार्गदर्शन में पूर्ण की. उन्होंने गेहूं में रतुआ रोग के विरुद्ध प्रतिरोध प्रदान करने वाले जीन की पहचान पर सफल शोध किया, जो भविष्य में रोग प्रतिरोधी गेहूं की किस्मों के विकास में सहायक होगा.

परिवार और शिक्षकों को दिया श्रेय: हरियाणा के जींद जिला की रहने वाली आरती खिप्पल ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, चाचा संदीप खिप्पल, शिक्षकों और विश्वविद्यालय प्रशासन को दिया. उनके पिता सुशील कुमार व्यवसायी हैं और माता संदीप देवी गृहिणी हैं. आरती ने अंतरराष्ट्रीय सैल की प्रभारी डॉ. आशा क्वात्रा और डॉ. मंजूनाथ का विशेष आभार जताया. आरती ने बताया कि, ” मेरी विशेष रुचि जीनोम एडिटिंग, जीन अध्ययन और आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी तकनीकों में है. मेरा लक्ष्य वैज्ञानिक बनकर कृषि सुधार और अनुसंधान के क्षेत्र में योगदान देना है.”