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हरियाणा में जल्द दहाड़ेंगे शेर और बाघ, 10 हजार एकड़ में बनेगी जंगल सफारी

हरियाणा सरकार ने वर्ष 2025-26 के बजट में प्रस्तावित अरावली की जंगल सफारी परियोजना पर काम शुरू कर दिया है। इस परियोजना के तहत गुरुग्राम और नूंह जिले में लगभग 10,000 एकड़ क्षेत्रफल में जंगल सफारी विकसित की जाएगी। इसमें 15 किलोमीटर के तेंदुआ पार्क का निर्माण भी शामिल होगा। प्रारंभ में यह परियोजना राज्य के पर्यटन विभाग द्वारा तैयार की जानी थी, लेकिन अब इसका समस्त कार्य वन एवं वन्य प्राणी विभाग की देखरेख में किया जाएगा। प्रोजेक्ट के स्वरूप और डिजाइन को अंतिम रूप देने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पर्यावरण, वन एवं वन्य जीव मंत्री राव नरबीर 7 और 8 जून को गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा परियोजना का निरीक्षण करेंगे।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि जंगल सफारी में केवल ऐसे जानवर रखे जाएंगे जो मानव सुरक्षा के लिए खतरा न बनें। उन्होंने कहा कि यह परियोजना सभी नियमों और पर्यावरण मानकों के अनुरूप विकसित की जाएगी, तथा यहां ऐसे पौधे लगाए जाएंगे जो मानसून में आसानी से बढ़ सकें। साथ ही, सीएम ने पर्यावरण और वन विभाग की अन्य योजनाओं की भी समीक्षा की और जरूरी निर्देश दिए।

ड्रेनेज सिस्टम सुधार पर जोर

बैठक में मुख्यमंत्री ने ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सीवर या औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला गंदा पानी सीधे नालों में न जाए। इसके लिए इन स्थानों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस पहल की शुरुआत अंबाला, कुरुक्षेत्र और यमुनानगर जिलों से की जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि आने वाले तीन महीनों में इन जिलों में साफ-सफाई और ड्रेनेज व्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार दिखना चाहिए।

वनतारा प्रोजेक्ट और अन्य विश्व स्तरीय सफारी पार्क

गुजरात के जामनगर में स्थित वनतारा प्रोजेक्ट, रिलायंस रिफाइनरी के ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में स्थापित है। यह भारत और विश्वभर से घायल, बीमार और संकटग्रस्त वन्यजीवों को बचाने, उनका इलाज करने और पुनः प्राकृतिक आवास में छोड़ने का कार्य करता है। वर्तमान में शारजाह (यूएई) में अफ्रीका के बाहर सबसे बड़ा सफारी पार्क है, जो लगभग 2,000 एकड़ में फैला है। इसके मुकाबले हरियाणा का प्रस्तावित जंगल सफारी लगभग पांच गुना बड़ा होगा।

परियोजना के आकर्षण

  • इस जंगल सफारी में कई अनोखे आकर्षण होंगे, जिनमें शामिल हैं:
  • बाघ और शेर के लिए समर्पित क्षेत्र
  • बड़ी बिल्लियों के लिए चार अलग-अलग क्षेत्र
  • उभयचर और सरीसृपों के लिए हर्पेटेरियम
  • शाकाहारी जानवरों का बड़ा क्षेत्र
  • विदेशी जानवरों और पक्षियों के लिए विशेष खंड
  • पक्षियों के लिए बड़ा बाड़ा
  • वनस्पति उद्यान
  • प्रकृति के दुर्गम रास्ते
  • पानी के नीचे की दुनिया की झलक

यह परियोजना न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी, बल्कि वन्यजीव संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।