संतान की खुशहाली के लिए माताओं ने रखा तिलकुट व्रत

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भिवानी। तिलकुट व्रत पर मंगलवार को माताओं ने अपनी संतानों की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना को लेकर व्रत रखा। इस दौरान घरों में परिवार की बुजुर्ग महिलाओं से संकट चौथ यानी तिलकुट व्रत की पौराणिक कथाएं सुनी गईं और सूर्य को अर्घ्य दिया गया। वहीं देर शाम महिलाओं ने चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित कर उपवास खोला।

तिलकुट व्रत के अवसर पर शहर के बाजारों में तिल से बनी खाद्य वस्तुओं की स्टॉलें सजी रहीं और तिल के सामान की जमकर खरीदारी हुई। बाजार में तिल, गुड़, तिल के लड्डू, तिलकुट, पूजन सामग्री, फल-फूल, दीपक और धूप-बत्ती की दुकानों पर भी बिक्री में बढ़ोतरी देखने को मिली। इसके साथ ही शहर की मिठाई की दुकानों पर तिल से बनी विशेष मिठाइयां तैयार की गईं। मिठाई दुकानदार प्यारेलाल ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी तिल से बनी वस्तुओं की मांग अधिक रही। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालु खरीदारी के लिए बाजारों में पहुंचे।

बाजार में सफेद तिल 140 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से बिका जबकि काला तिल 300 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। तिलकुट, तिल के लड्डू, लाई और गुड़ की दुकानों पर दिनभर ग्राहकों की भीड़ लगी रही। तिल और मावा से बनी मिठाइयां भी करीब 800 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिकीं। 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला परमेश्वरी देवी ने बताया कि तिलकुट चौथ, जिसे सकट चौथ भी कहा जाता है, संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और संकटों से मुक्ति के लिए किया जाने वाला व्रत है। इस दिन भगवान गणेश और चंद्रमा की पूजा की जाती है तथा तिल-गुड़ यानी तिलकुट का भोग और प्रसाद चढ़ाया जाता है। तिल और गुड़ से बना प्रसाद ठंड के मौसम में शरीर को ऊर्जा और पौष्टिकता प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि यह व्रत बुराइयों को दूर करने और सौभाग्य लाने से जुड़ा है, जबकि तिल और गुड़ से बनी तिलकुट मिठाई का विशेष महत्व है, जिसे भगवान गणेश को प्रिय माना जाता है और यह स्वास्थ्य व समृद्धि का प्रतीक है।