हरियाणा के बढ़ते वायु प्रदूषण को देख जींद में भी 5वीं क्लास यानी प्राइमरी स्कूल तक छुटि्टयां कर दी गई हैं। जींद के DC इमरान रजा ने इस बारे में आदेश जारी किए। इससे पहले गुरुग्राम, फरीदाबाद और झज्जर में नर्सरी से प्राइमरी तक स्कूल बंद किए जा चुके हैं।
बता दें कि दिल्ली NCR से सटे जिलों के DC को शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों में छुट्टी करने के अधिकार दिए थे। हरियाणा के 14 जिले एनसीआर में आते हैं। इनमें करनाल, जींद, पानीपत, सोनीपत, रोहतक, भिवानी, चरखी दादरी, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, नूहं और पलवल हैं। इनमें से गुरुग्राम, फरीदाबाद, झज्जर और जींद में स्कूल बंद किए जा चुके हैं। बाकी 10 जिलों को लेकर भी जल्द फैसला हो सकता है।
वहीं हरियाणा में 10 नवंबर के बाद आबोहवा शुद्ध होने का दावा मौसम विशेषज्ञों ने दावा किया है। उनका कहना है कि 10 नवंबर से मध्यम गति से उत्तर-पश्चिमी हवाएं चलेंगी, इससे प्रदूषण के स्तर में काफी कमी आएगी। विशेषज्ञों ने यह भी दावा किया है कि इस दौरान राज्य में दिन के अधिकतम तापमान में हल्की बढ़ोतरी होने की संभावना है, लेकिन रात के न्यूनतम तापमान में गिरावट देखने को मिलेगी, इससे लोगों को ठंड का अहसास होगा।
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विभाग के चीफ प्रोफेसर मदन खीचर ने दावा किया है कि 7 नवंबर यानी आज एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ पहाड़ों की ओर बढ़ेगा, जिसके बाद 8 और 9 नवंबर को पूर्वी हवाएं चलेंगी, जिससे आंशिक रूप से बादल छा सकते हैं। इससे दिन में तो हल्की गर्मी और रात में ठंड बढ़ेगी।
हरियाणा में प्रदूषण का स्तर लगातार खराब हो रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी वजह कमजोर पश्चिमी विक्षोभ पहाड़ों की ओर जाने से बनी है। इस कारण से धीमी गति से पूर्वी हवाएं चलने लगी हैं, जिससे वातावरण में नमी की मात्रा बढ़ी है। इससे धूल और अन्य प्रदूषकों को नमी की ओर धकेल दिया है। इस कारण से निचले वातावरण में धुंध जैसे हालात बन गए हैं और सांस लेने में दिक्कत आ रही है।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की ओर से ग्रैप-4 का सिफारिशों को लागू किए जाने के बाद बीएस-4 व अन्य डीजल वाहनों की एंट्री बंद तो दिल्ली में की गई हैं। इसका सबसे ज्यादा असर NCR क्षेत्र के जीटी बेल्ट के जिलों में ही नहीं बल्कि राज्यभर में पड़ रहा है। जीटी बेल्ट के जिलों से करीब 1500 ट्रक जो दिल्ली में प्रवेश करते थे, उनके पहिये ठहर गए हैं, जिससे वाहन संचालकों को करीब 50 लाख रुपए प्रतिदिन की क्षति उठानी पड़ रही है। इसके अलावा ट्रकों से आने-जाने वाले माल के समय पर नहीं पहुंचने से करोड़ों की चपत लग रही है।
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