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सर्दी से बचाने के लिए चिड़ियाघर में जानवरों के लिए खास इंतजाम

कुरुक्षेत्र: पहाड़ों में हो रही बर्फबारी के चलते अब मैदानी इलाकों में भी ठंड का कहर जारी है. कोहरे और शीतलहर का असर जनजीवन पर पड़ा है. बढ़ती ठंड को देखते हुए अधिकारियों ने उत्तर हरियाणा के एकमात्र चिड़ियाघर में जानवरों को ठंड से बचाने के लिए उनके बाड़े में हीटर और पर्दे लगाए हैं. कुछ जानवरों का सर्दियों के हिसाब से डायट प्लान भी बदला गया है.

पिपली चिड़ियाघर में जानवरों को ठंड से बचाने का विशेष इंतजाम: उत्तर हरियाणा का एकमात्र चिड़ियाघर कुरुक्षेत्र के पिपली में स्थित है. जहां पर पर्यटक हरियाणा के साथ-साथ दूसरे राज्यों से और विदेशों से चिड़ियाघर देखने के लिए पहुंचते हैं. ये चिड़ियाघर बच्चों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रहता है, क्योंकि इस चिड़ियाघर में 73 प्रकार के जानवर रखे गए हैं. जिसमें 31 मेल और 32 फीमेल हैं, जबकि मौजूदा समय में 10 बच्चे भी चिड़ियाघर में हैं. कुरुक्षेत्र के पिपली चिड़ियाघर में जानवरों को ठंड से बचने के लिए खास प्रबंध किए गए हैं.

जानवरों के बाड़े में लगाए गए हीटर और पर्दे: पिपली चिड़ियाघर के इंचार्ज वाइल्डलाइफ इंस्पेक्टर देवेंद्र ने बताया कि “पिछले कई दिनों से ठंड की वजह से इंसान सहित जानवर और पशु पक्षियों का जीवन प्रभावित हो रहा है, क्योंकि कड़ाके की ठंड पड़ रही है. ऐसे में पिपली चिड़ियाघर में सर्दी से जानवरों का बचाव करने के लिए खास प्रबंध किए हैं.”

उन्होंने कहा कि “शेर और पैंथर के बाड़े में खास तौर पर हीटर लगाए गए हैं, ताकि उनको सर्दी से बचाया जा सके. इसके अलावा हाइना, पैंथर और शेर के बाड़े में पर्दे भी लगाए गए हैं, ताकि सर्दी का प्रकोप कम हो और उनको सुरक्षित रखा जा सके, क्योंकि इतनी ठंड में जानवरों को सर्दी से बचना जरूरी होता है. वरना वो सर्दी की चपेट में आ सकते हैं.”

कुछ जानवरों के डाइट प्लान में किया गया बदलाव: पिपली चिड़ियाघर के इंचार्ज वाइल्डलाइफ इंस्पेक्टर देवेंद्र ने कहा कि “कुछ ऐसे जानवर भी चिड़ियाघर में रखे गए हैं, जो शाकाहारी हैं. उनकी डाइट में बदलाव किया गया है, ताकि सर्दी से बचाए जा सके. लंगूर बंदरों को डाइट में मूंगफली दी जा रही है. मूंगफली गर्म होती है, इसलिए मूंगफली सर्दी से काफी हद तक लंगूर बंदरों का बचाव होता है. काले हिरण की डाइट में गुड़ को शामिल किया गया है, ताकि सर्दी से बचाया जा सके.”

लकड़ी के तख्त और पराली लगाई गई: देवेंद्र ने बताया कि “सर्दी काफी पड़ रही है, जहां जानवर बैठते हैं, वहां स्थान ठंडा होता है. ऐसे में उनके बैठने के लिए खास तौर पर बाड़े में लकड़ी के तख्त लगाए गए हैं. जिनके ऊपर पराली को बिछाया गया है. इस पर बैठने से जानवरों को ठंड कम लगेगी.”

पीने के लिए दिया जाता है ताजा पानी: इसके अलावा सांभर और हिरण के लिए पराली और लकड़ी की हट बनाई गई है. जिससे वो सर्दी के समय में उसके अंदर बैठ जाते हैं और सर्दी से उनका बचाव होता है. पानी में रहने वाले जानवरों का पानी सप्ताह में तीन बार बदला जाता है. उन्होंने बताया कि उनके पास ऐसे बहुत से जानवर हैं जो पानी में रहने वाले हैं. उनको भी ठंड से बचाने के लिए सप्ताह में करीब तीन दिन पानी बदल दिया जाता है, ताकि उनको ठंड ना लगे. वहीं पीने के लिए भी उनको ताजा पानी दिया जा रहा है. चिड़ियाघर प्रशासन का पूरा प्रयास है कि जितने भी चिड़ियाघर में जानवर रखे गए हैं. सभी को ठंड के प्रकोप से बचाया जा सके.

सप्ताह में दो से तीन बार डॉक्टर करते हैं विजिट: देवेंद्र ने बताया कि “सर्दियों का मौसम जानवरों लिए काफी चुनौतियां वाला रहता है और हर एक जानवर का स्वास्थ्य ठीक रखना पहली प्राथमिकता होती है. इसलिए रोहतक से सप्ताह में तीन बार डॉक्टर जानवरों का चेकअप करने के लिए आते हैं अगर कोई इमरजेंसी हो तो स्थानीय डॉक्टर से संपर्क करके उनको भी बुलाया जाता है. सर्दियों के मौसम के लिए चिड़ियाघर में रहने वाले सभी जानवरों के लिए चिड़ियाघर प्रशासन ने हर संभव कदम उठाए हैं, ताकि किसी भी जानवरों को ठंड ना लगे और उनके पूरे सीजन ठंड से बचाव किया जा सके.”