विधायकों की गैरमौजूदगी ने सिरसा कांग्रेस में खड़े किए सवाल; जिला अध्यक्ष ने जताया दर्द

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सिरसा: सिरसा जिले में कांग्रेस संगठन की अंदरूनी कलह एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर उजागर हो गई. मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत कांग्रेस पार्टी द्वारा प्रदेशभर में आयोजित जिला स्तरीय उपवास कार्यक्रम में सिरसा कांग्रेस की फूट साफ नजर आई. इस कार्यक्रम का उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने के आरोप लगाना था, लेकिन सिरसा में यह आयोजन मुद्दों से ज्यादा संगठन की कमजोरी और आपसी मतभेदों की चर्चा का कारण बन गया.

जिला अध्यक्ष के सिवाय नहीं पहुंचा कोई बड़ा नेता: सिरसा जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित इस अहम कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष संतोष बेनीवाल के अलावा पार्टी का कोई भी बड़ा नेता या स्थानीय विधायक मौजूद नहीं रहा. जबकि सिरसा जिले से कांग्रेस के तीन विधायक हैं, इसके बावजूद किसी भी विधायक की उपस्थिति नहीं होना पार्टी की कार्यशैली और अनुशासन पर सवाल खड़े करता है. जिला स्तर के कार्यक्रम में विधायकों की गैरहाजिरी को कार्यकर्ताओं ने भी गंभीरता से लिया.

जिला अध्यक्ष संतोष बेनीवाल का छलका दर्द: कार्यक्रम के दौरान जिला अध्यक्ष संतोष बेनीवाल का दर्द खुलकर सामने आया. उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि, “दुर्भाग्य की बात है कि जिले के विधायक खुद को पार्टी से बड़ा मानने लगे हैं. इसी वजह से पार्टी के जिला स्तरीय कार्यक्रमों में उनकी रुचि नहीं रहती. जब कोई बड़ा नेता जिले में आता है तो सभी विधायक और नेता चमचागिरी करने पहुंच जाते हैं, लेकिन संगठन के कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखते हैं.”

विधायकों की गैरमौजूदगी ने खड़े किए सवाल: कांग्रेस जैसे बड़े संगठन में जिला स्तरीय कार्यक्रमों को संगठन की रीढ़ माना जाता है. ऐसे में सिरसा में विधायकों का न आना यह दर्शाता है कि संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल की कमी है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यही स्थिति रही तो इसका सीधा असर आगामी चुनावों और पार्टी की जमीनी पकड़ पर पड़ सकता है.