हजारों एकड़ खेत डूबे, अब नहरों से निकासी; कई गांवों में जलभराव बरकरार

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भिवानी। पिछले तीन माह से जिले के करीब 45 हजार एकड़ खेतों में तबाही मचाने वाला बरसाती पानी अब जलघर के टैंकों में प्रदूषण का जहर घोलने लगा है। सिंचाई विभाग की अथक कोशिशों से जलभराव में डूबे गांवों के आबादी क्षेत्र से पानी की निकासी करा दी गई है लेकिन बवानीखेड़ा और तोशाम क्षेत्र के कुछ गांव अभी भी बरसाती जलभराव की मार झेल रहे हैं। जाटूलुहारी, दांग खुर्द और रिवासा सहित प्रेमनगर व तिगड़ाना के खेतों में जमा बरसाती पानी किसानों के लिए नासूर बना हुआ है। कई महीनों तक ड्रेनों के जरिए पानी की निकासी कराई गई लेकिन अब बड़ी नहरों और डिस्ट्रीब्यूटरी नहरों में भी खेतों का सड़ चुका दूषित पानी छोड़ा जा रहा है जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के जलघर टैंकों में प्रदूषण का जहर पहुंच रहा है। जिन गांवों के जलघर जलभराव के दौरान डूब गए थे उनके टैंक अब भी बदहाल पड़े हैं और सफाई के लिए अधिकारी बजट का इंतजार कर रहे हैं।

भिवानी जिले में मानसून के दौरान हुई अधिक बारिश के कारण खेतों में तीन माह से बरसाती जलभराव बना हुआ है। जाटूलुहारी, प्रेमनगर और दांग खुर्द के आसपास के खेतों से अभी भी बरसाती पानी की पूरी निकासी नहीं हो पाई है। सिंचाई विभाग खेतों के सड़े पानी को नहरों के जरिए निकालने में जुटा है जिससे नहरी पानी के रास्ते जलघरों के टैंकों तक प्रदूषित पानी पहुंच रहा है। ड्रेनों के साथ-साथ बरसाती पानी की निकासी जूई नहर, मिताथल फीडर और डिस्ट्रीब्यूटरी नहरों में कराई जा रही है जो पेयजल की शुद्धता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।

सिंचाई विभाग का दावा है कि खेतों के पानी की निकासी ड्रेनों में कराई जा रही है और नहरों में पानी बंद रहने के दौरान ही खेतों का पानी डाला जा रहा है। लेकिन नहर में पानी आने पर यही गंदा पानी जलघर टैंकों तक पहुंचकर बीमारियों का संक्रमण फैला सकता है जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ना तय है।

नहरों में पहुंच रहा इन गांवों का दूषित पानी

तोशाम क्षेत्र के गांव सागवान की करीब 100 एकड़ से अधिक कृषि भूमि पर तीन माह से बरसाती जलभराव बना हुआ है। गांव दांग कलां में करीब 35 एकड़ और रिवासा में लगभग 20 एकड़ जमीन पर अब भी बरसाती पानी जमा है। इनका पानी निगाना फीडर में छोड़ा जा रहा है। गांव दांग कलां के पास निगाना फीडर के प्रथम पंप हाउस पर मोटरें लगाकर खेतों का पानी नहर में डाला जा रहा है। इस पानी से झाग बन रहा है जो इसके प्रदूषित होने का सीधा संकेत है।

निगाना फीडर से जुड़ी है कई गांवों की पेयजल आपूर्ति

निगाना फीडर का पहला पंप हाउस गांव दांग के पास और अंतिम छोर का पंप हाउस गांव मिताथल के पास स्थित है। इसी फीडर से भिवानी और तोशाम क्षेत्र के कई गांवों की पेयजल आपूर्ति होती है। नहरी पानी आने पर इन्हीं से जुड़े जलघर टैंकों को भरा जाता है लेकिन अब खेतों के दूषित पानी की निकासी भी फीडर में होने के कारण जलघर टैंकों तक प्रदूषित पानी पहुंच रहा है।

बारिश के दौरान गांव का जलघर टैंक महीनों तक पानी में डूबा रहा। कुछ परिवारों को तो पलायन तक करना पड़ा। अब हालात सामान्य जरूर हुए हैं लेकिन जलघर टैंकों के अंदर तबाही के निशान अभी भी मौजूद हैं। टैंकों की पूरी सफाई नहीं हो पाई है और आपूर्ति में आने वाले पानी का स्वाद भी ठीक नहीं है।

जलभराव में किसानों ने पहले फसल बर्बादी का नुकसान झेला और अब स्वच्छ पेयजल के लिए तरस रहे हैं। जलघर के टैंकों की नियमित सफाई नहीं होती वहीं बूस्टर के टैंक भी बदहाल पड़े हैं। इनके अंदर गंदगी भरी है और नलों से आने वाला पानी भी मटमैला रहता है।

खेतों में तीन माह तक सड़ा पानी अब नहरों में छोड़ा जा रहा है। यही पानी जलघर के टैंकों से घरों तक पहुंच रहा है। पानी को शुद्ध करने के लिए विभाग के पास न उपकरण हैं न ही पर्याप्त मशीनरी। मोटरों के जरिए दूषित पानी सीधे घरों तक पहुंच रहा है जिससे लोगों की सेहत पर खतरा मंडरा रहा है।

बरसाती जलभराव वाले अधिकांश गांवों के पानी की निकासी करा दी है जबकि कुछ क्षेत्रों में अब भी बरसाती पानी है। इन निचले इलाकों से पानी की निकासी कराई जा रही है। जलघरों के टैंकों तक दूषित पानी नहीं जाने दिया गया है। इस दौरान नहर के सभी आउटलेट बंद रखे गए हैं।