यमुनानगर: धान घोटाले को लेकर पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई जारी है. मामले में मुख्य आरोपी संदीप सिंघला की पहले ही गिरफ्तारी हो चुकी है, बाकी आरोपियों की तलाश जारी है. इस बीच पुलिस ने घोटाले से जुड़ी संपत्तियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. मामले में आरोपी रितिका सिंघला के खिलाफ लैंड रेवेन्यू एक्ट के तहत कार्रवाई की गई. यमुनानगर में स्थित उनकी संपत्तियों को अटैच किया गया है. पूरा मामला एसआईटी के पास है.
धान घोटाले में बड़ा खुलासा: धान घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं. एसआईटी जांच कर रही है कि आखिर धान का गबन कैसे हुआ? इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे? और घोटाले की रकम आखिर कहां गई? शुरुआती जांच में सामने आया है कि एक ही परिसर में चार राइस मिलें संचालित हो रही थीं, जबकि कागजों में स्थिति कुछ और दिखाई गई थी.
विभागीय मिलीभगत की आशंका: जांच एजेंसियों का मानना है कि बिना विभागीय मिलीभगत के इतना बड़ा खेल संभव नहीं था. इस वजह से अब उन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, जिन पर संदेह है.
प्रशासन की कार्रवाई जारी: खाद्य एवं पूर्ति विभाग के अधिकारी जतिन मित्तल ने बताया कि “साल 2024–2025 के दौरान फूड सप्लाई विभाग ने न्यू किसान राइस मिल को करीब दो करोड़ रुपये का डिफॉल्ट घोषित किया था. इस मामले में मिल मालिक की जमीन, मकान और राइस मिल को पहले ही कुर्क किया जा चुका है. विभाग के पास इस संपत्ति से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड मौजूद है. अब प्रशासन की अगली कार्रवाई प्रॉपर्टी की पोजेशन लेने को लेकर है, लेकिन इससे पहले यह तय किया जा रहा है कि संपत्ति की सीमाएं कहां तक हैं और कितना क्षेत्र विभाग के अंतर्गत आता है? इसके लिए मौके पर डिमार्केशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि मिल मालिक की ओनरशिप स्पष्ट हो सके.”
रिकवरी प्रक्रिया शुरू: जांच में यह भी सामने आया है कि मिल मालिक की एक और राइस मिल किसान राइस मिल के नाम से है, जो हैफेड के अंतर्गत आती है. दोनों मिले आपस में बिल्कुल साथ-साथ स्थित हैं और दोनों में ही डिफॉल्ट हुआ है. हैफेड विभाग ने भी अपनी रिकवरी प्रक्रिया शुरू कर दी है.

















