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राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने प्रदेशभर के शिक्षकों को पढ़ाया प्राकृतिक खेती और संस्कारों का पाठ

भिवानी:
गुजरात के महामहिम राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने मंगलवार को हरियाणा शिक्षा बोर्ड भिवानी में संस्कारयुक्त शिक्षा व प्राकृतिक खेती पर आयोजित कार्यशाला में प्रदेशभर के शिक्षकों को प्राकृतिक खेती व संस्कारों का पाठ पढ़ाया।
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने मुख्यमंत्री  नायब सिंह सैनी सहित प्रदेश सरकार व हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड का आभार प्रकट करते हुए कहा कि हरियाणा में नई शिक्षा नीति लागू करने के साथ-साथ संस्कारयुक्त शिक्षा और प्राकृतिक  खेती पर जोर दिया जा रहा है, जो कि आने वाली पीढिय़ों को बचाने के लिए जरूरी है।
संस्कारयुक्त शिक्षा ही देश व समाज की नींव है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों को भी प्राकृतिक खेती के बारे जागरूक करें। उन्होंने कहा कि डीएपी और रसायनयुक्त खेती से खानपान जहरीला हो गया है, जिससे इंसान जानलेवा बीमारियों की चपेट में आ रहा है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को अपनाकर ही हम अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित कर सकते हैं।
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार ने महामहिम राज्यपाल आचार्य देवव्रत का स्वागत करते हुए कहा कि वे प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करके पुनित कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने महामहिम राज्यपाल को प्रकृति का संरक्षक बताते हुए कहा कि प्रकृति में संतुलन बनाने के लिए जो कार्य कर रहे हैं, इसके लिए आने वाली पीढिय़ां उनकी आभारी रहेंगी। वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दिशा-निर्देश पर पूरे देश में क्रांति लाने का काम कर रहे हैं। डॉ. पवन कुमार ने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे राज्यपाल से प्रेरणा लेकर प्राकृतिक खेती के अभियान को आगे बढ़ाने का काम करें।
कार्यक्रम में शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार ने सभी का स्वागत किया और राज्यपाल सहित सभी विशिष्ट व अतिविशिष्ट अतिथियों को शॉल व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। शिक्षा बोर्ड परिसर स्थित सर्वपल्ली राधाकृष्णन् लैब स्कूल के बच्चों द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया तथा श्लोक उच्चारण किया गया।
महामहिम राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने शिक्षकों को संदेश देते हुए कहा कि संस्कारों व शिक्षा स्तर के मामले में भारत देश एक जमाने में विश्व गुरु था।
लेकिन समय के साथ-साथ शिक्षा का स्वरूप बदलता गया और शिक्षा संस्कार विहीन होती गई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में नई शिक्षा नीति लागू कर शिक्षा को फिर से संस्कारयुक्त बनाया गया है। उन्होंने देश में प्राकृतिक खेती को राष्ट्रीय प्राकृतिक मिशन बनाने पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का भी आभार जताया।
राज्यपाल ने कहा कि देश में प्राकृतिक खेती का बहुत तेज गति से विस्तार हो रहा है। आज देश में करीब 40 लाख किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं, जिसका आधार देशी गाय है। गुजरात में आठ लाख और हिमाचल में दो लाख किसान प्राकृतिक खेती करने लगे हैं।
उन्होंने कहा कि करीब 30-40 साल पहले कैंसर, ह्रदयघात, किडनी, लीवर या डायबिटीज से संबंधित बीमारी सुनने को नहीं मिलती थी, लेकिन आज अस्पतालों में इन बीमारियों के मरीजों की भरमार है और इन बीमारियों का कोई ठोस उपचार नहीं मिल रहा है। छोटे-छोटे बच्चे कैंसर की चपेट में आ रहे हैं। यहां तक कि पशुओं को भी कैंसर हो रहा है। उन्होंने कहा कि बीमारियों से बचने के लिए हमने सबसे पहले धरती को जहरीली होने से बचाना होगा। आने वाली पीढियो को सुरक्षित रखने के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाएं। वहीं खाएं जो हमारा भोजन है, वहीं पीएं जो प्रकृति ने पीने के लिए दिया है।
आचार्य देवव्रत ने कहा कि वर्तमान मेंं सारा खान-पान जहरीला हो गया है। यहां तक कि मां का दूध भी रासायनिक जहर से अछूता नहीं रहा है। स्वस्थ रहने के लिए इंसान को प्रकृति की गोद में जाना होगा और जीव-जंतु और पशु-पक्षियों की तरह ही प्राकृतिक  रूप से बने खानपान अपनाना होगा।
शिक्षक का आदर्श इंसान होना जरूरी – आचार्य देवव्रत
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि शिक्षक एक संस्था है। शिक्षक ही देश, समाज व आने वाली पीढय़िों का निर्माण करता है। ऐसे में शिक्षक का जीवन आदर्श होना चाहिए। एक छोटा बच्चा या विद्यार्थी अपने गुरुजन और माता-पिता को देखकर ही सीखता है। यह कतई ना भूलें कि हम बच्चों को मूर्ख या नासमझ मानकर जो कर रहे हैं, उनको बच्चा समझ नहीं रहा है, बल्कि बच्चे शिक्षक का एक उपनाम उनके गुण-अवगुण के आधार पर भी रखते हैं। अध्यापक और माता-पिता को सचेत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिसकी प्राईवेट लाईफ सही नही है, उनकी पब्लिक लाईफ भी सही नही हो सकती। उन्होंने कहा कि शिक्षक को संस्कारयुक्त विचारों व आदर्शो की पूंजी होना चाहिए। शिक्षक का आचरण ही आने वाली पीढिय़ों को बदलेगा, तभी प्रधानमंत्री श्री मोदी के विकसित भारत का सपना साकार होगा। उन्होंने कार्यशाला के आयोजन पर शिक्षा बोर्ड के  अध्यक्ष डॉ.पवन कुमार के साथ-साथ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन का भी आभार जताया।
सांसद धर्मबीर सिंह ने कहा कि जिस ढंग से अनाज, सब्जियां आदि जहर युक्त हो चुकी हैं, उससे मानव का जीवन खतरे में है। इन परिस्थितियों में राज्यपाल आचार्य देवव्रत मानवता के लिए काम कर रहे हैं। सांसद ने कहा कि आचार्य देवव्रत के संदेश से यह प्रण लेना चाहिए कि हम कम से कम अपने घर में प्रयोग के लिए प्राकृतिक खेती जरूर करें। सांसद ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी भी जहर हो चुकी खाद्य सामग्री को लेकर बेहद चिंतित हैं और प्राकृतिक खेती पर जोर दे रहे हैं। सांसद ने कहा कि आज कोई घर/परिवार नहीं बचा जिसके सदस्य दवाई न खाते हों, ये बेहद चिंतनीय है। प्राकृतिक खेती का रास्ता नहीं चुना तो मानव जीवन खतरे में पड़ जाएगा।
बोर्ड अध्यक्ष ने इस अवसर पर महामहिम राज्यपाल सहित सभी अतिथियों का आभार जताया। कार्यक्रम का विधिवत समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन प्रो. हरिकेश पंघाल ने किया। इस दौरान भिवानी के विधायक घनश्याम सर्राफ, दादरी से विधायक सुनील सांगवान, बाढड़ा से विधायक उमेद पातुवास, बवानी खेड़ा से विधायक कपूर सिंह वाल्मीकि, चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर प्रो. दीप्ति धर्माणी, जिला शिक्षा अधिकारी  निर्मल दहिया, दादरी के जिला शिक्षा अधिकारी धर्मेंद्र, बोर्ड से उप-सचिव ओमप्रकाश निंबिवाल व जगदीश प्रसाद सैनी सहित बोर्ड के अन्य अधिकारी/कर्मचारी के अलावा प्रदेशभर के शिक्षक व गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।