गुजरात में शुरू किया गया प्राकृतिक खेती का मॉडल भारत सरकार को भेजा हुआ है, जिसमें महिलाओं को भी मास्टर टे्रनर तैयार करना व तीन-तीन गांवों का कलस्टर बनाकर किसानों व आमजन को प्राकृतिक खेती के बारे में जागरूक करना शामिल है।
गुजरात के विश्व विद्यालयों में प्राकृतिक खेती पर सेमिनार आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिए संगठित होकर जागरूकता ही मुख्य विकल्प बताया।
महामहिम राज्यपाल बया पर्यटक केंद्र में वर्किंग जर्नलिस्टस एसोसिएशन द्वारा आयोजित प्राकृतिक खेती पर पत्रकारों से संवाद कार्यक्रम में अपना संदेश दे रहे थे, जिसमें भिवानी के विधायक घनश्याम सर्राफ, बादली से विधायक कुलदीप वत्स, चौ. बंसीलाल विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो.दीप्ति धर्माणी, प्रमुख समाजसेवी बृजलाल सर्राफ, पूर्व मंत्री डॉ. वासुदेव शर्मा, प्रमुख समाजसेवी संपूर्ण सिंह, पूर्व सूचना आयुक्त भूपेन्द्र धर्माणी, दीपक बंसल के अलावा बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी अनेक वरिष्ठï पत्रकार व छायाकार तथा शहर के अनेक उद्योगपति, समाजसेवी व गणमान्य नागरिक भी शामिल हुए।
इस अवसर पर भिवानी महापंचायत द्वारा सीबीएससी की 10वीं की परीक्षा में 499/500 अंक प्राप्त करने वाली वैश्य मॉडल स्कूल की छात्रा, उसके अध्यापकों व अभिभावकों को भी सम्मानित किया गया। भिवानी महापंचायत के सरंक्षक प्रमुख समाजसेवी बृजलाल सर्राफ ने आए हुए अतिथियों व पत्रकारों का स्वागत किया।
राज्यपाल देवव्रत ने कहा कि हमारे मकानों में रसोई की तरह ही धरती पौधों की रसोई है, जिसमें सभी खनिज तत्व जड़वत हैं। उन्होंने कहा कि हमें धरती में विद्यमान तत्वों, मित्र कीट, केचुओं को बचाना है, जो सूक्ष्म जीवाणुओं का निर्माण करते हैं।
उन्होंने चिंता प्रकट करते हुए कहा कि आज भूजल लगातार गिरता जा रहा है और जहर भी हो गया है। आज की जहरयुक्त खेती के साथ-साथ आने वाले समय में पीने के लिए पानी भी नहीं मिलेगा। उन्होंने प्राकृतिक खेती के उत्पादन के लिए सूक्ष्म जीवाणु तैयार करने के लिए गोबर, मूत्र का फार्मूला भी बताया।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती घाटे का सौदा नहीं है। वे कुरुक्षेत्र में अपने 200 एकड़ के खेत में पूरा साल विभिन्न फसलों की पैदावार लेते हैं। इसको अपनाकर किसान हर महीने आमदनी ले सकता है। उन्होंने कहा कि किसानों को चाहिए कि वे प्राकृतिक खेती के साथ-साथ देसी गाय को पालें। हमने रासायनिक खादों के प्रयोग से जमीन को बंजर बनाने के साथ-साथ देसी गायों की करीब 55 नस्लों को भी खत्म कर दिया है। इन नस्लों को फिर से लाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि देसी गाय हमारे लिए भगवान का वरदान है। गाय के एक ग्राम गोबर में 300 करोड़ से अधिक विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया होते हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती देसी गाय के गोबर और गौमूत्र पर आधारित है, जबकि जैविक खेती में केवल गोबर की खाद डालते हैं, जिससे उत्पादन नहीं बढ़ता है। प्राकृतिक और जैविक खेती दोनों अलग-अलग तरह की होती हैं।
उन्होंने कहा कि हरित क्रांति के समय धरती पर सूक्ष्म जीवाणों का भंडार था, लेकिन समय के साथ-साथ रसायनिक प्रयोगों ने धरती को बंजर बना दिया। अगर स्थिति यही रही तो आने वाले समय में धरती पर बोझ और बढेगा तथा मानव जीवन खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी इस बात से बेहद चिंतित हैं कि धरती बंजर हो रही है और मानव जीवन बीमारियों से घिरता जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हुए हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों को इस बात के लिए प्रेरित करें कि वे अपने लिए खेत के उतने हिस्से में प्राकृतिक खेती जरूरी करें, जिससे उसके घर का काम चल सके। प्राकृतिक खानपान ही अपनाएं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक अनाज व सब्जियों की मांग बढ़ेगी तो इसका विस्तार भी बढ़ेगा।
इस अवसर पर जिले के 2 दर्जन से अधिक पत्रकारों को भी सम्मानित किया गया। जगबीर घणघस, श्रीभगवान वशिष्ठ, कृष्ण सरदार, नवनीत शर्मा, मयूर जांगड़ा, हरी किशन, राकेश कुमार, अजय नायक, रवि जांगड़ा, दीपक मुटरेजा, दीपक कुमार, सुनिल शर्मा, अनुपम शर्मा व विरेंद्र तंवर, जगबीर जेडी, राजु डुडेजा, संजय वर्मा, गुलशन वर्मा, शिव गुलिया, विनोद शर्मा, नरेंद्र नैनू, संजय कोकचा, राजकुमार डुडेजा, नरोत्तम बागड़ी, केसरी शमा, पवन मित्तल, अशोक शर्मा, मदन श्योराण, मिंटू सिंह, सूखबीर सिंह महामहिम राज्यपाल आचार्य देवव्रत के हाथों सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर नगर परिषद प्रधानप्रतिनिधि भवानी प्रताप सिंह, रामदेव तायल, उद्योगपति सुरेश गुप्ता, पवन बुवानीवाला, सुंदरलाल गोटेवाला, विजय टुटेजा, देवराज महता, विजय टैणी, कैलाश चंद शर्मा, कर्ण मृग, निकुंश असीजा, प्रवीण असीजा, अमित गाबा, नरेंद्र शर्मा, जगदीश गिरधर सहित बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।



























